logo
  • image
  • image
logo

    कृषि :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-प्रमोद जायसवाल

    image

  • image

    गेहूं झारखंड में उपयोग की जाने वाली एक प्रमुख फसल तो है, लेकिन उत्पादकता की दृष्टि से राज्य अन्य राज्यों की तुलना में काफी पिछड़ा हुआ है। कारण, गेहूं रबी की फसल है और इसके लिए पानी की आवश्यकता अधिक होती है, जबकि यहां सिंचाई की समुचित व्यवस्था का अभाव है। झारखंड में गेहूं की उत्पादकता को देखें यह प्रति हेक्टेयर 2.12 टन है जो राष्ट्रीय मानक से काफी कम है। झारखंड में गेहूं और जौ की फसलों का उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है इस पर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में देश-विदेश से 300 वैज्ञानिक आये और तीन दिनों तक इस पर गहन चिंतन किया। चिंतन और मंथन के बाद निष्कर्ष यह निकला कि झारखंड में गेहूं की उपज बढ़ाना सम्भव है।

    सफलता :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ब्रजेश राय

    image

  • image

    संघर्ष पर विजय पाकर सुजाता भकत ने बनायी अंतरराष्ट्रीय पहचान कोई मिसाल यूं ही नहीं बन जाता... मिसाल बनने के पीछे की कहानी और संघर्ष की एक पूरी कहानी होती है। यह कहानी है- पावर लिफ्टर सुजाता भकत की जिन्होंने अपने संघर्ष पर विजय पाते हुए बुलंदियों की मिसाल कायम की है। पेशे से पुलिस अधिकारी सुजाता भकत झारखंड पुलिस के स्पेशल ब्रांच में इंस्पेक्टर रैंक पर पदस्थापित हैं, लेकिन उनकी असली पहचान स्ट्रांग वूमन के रूप में है। पावर लिफ्टिंग में उन्होंने झारखंड पुलिस को दर्जनों नेशनल और इंटरनेशनल गोल्ड दिलवाने का काम किया है।

    जज्बा :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-साक्षी अग्रवाल

    image

  • image

    जिंदगी जीने की जिद हो तो मौत को भी मात दिया जा सकता है. ऐसा ही कर दिखाया है डोरंडा, रांची के इबरार कुरैशी ने। कुरैशी कैंसर को हराकर अब दूसरों को इससे जीतना सिखा रहे हैं.

    नयी सोच :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-साक्षी अग्रवाल

    image

  • image

    आज की नयी पीढ़ी ने नये तरीके से सोचना शुरू कर दिया है। यह पीढ़ी न सिर्फ नये रास्ते तलाश रही है, बल्कि नये रास्ते बनाने भी शुरू कर दिये हैं। सभी जानते हैं आज के इस दौर में जब रोजगार के अवसर कम हैं तब कुछ हटकर, कुछ नया कर जीवन को सहज बनाया जा सकता है। ऐसे में रांची के कुछ युवाओं ने कबाड़ी जैसे व्यवसाय को अपनी सोच से नया ही रूप दे दिया है। कबाड़ी डॉट कॉम नाम से शुरू किया गया यह व्यवसाय नित नये रूप ले रहा है।

    घोटाला :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-उपेन्द्रनाथ पांडेय

    image

  • image

    झारखंड में जमीन को लेकर फर्जीवाड़ा कोई नयी बात नहीं है। सरकार इस पर लगाम लगाने के लिए उपाय करती भी है तो घोटालेबाज इसका तोड़ निकालने के नये तरीके ढूंढ लेते हैं। जमीन का यह घोटाला कम्यूटर को हथियार बनाकर किया जा रहा है, वह भी अधिकारियों की नाक के नीचे। आलम तो यह है कि इस खेल में सीओ के हस्ताक्षर गलत तरीके से इस्तेमाल करने से घोटालेबाज चूक नहीं रहे है।

    समस्या :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-उपेन्द्रनाथ पांडेय

    image

  • image

    इस साल बरसात के मौसम ने झारखंड की राजधानी रांची को नयी मुसीबत में डाल दिया. कहने को तो स्वच्छता को लेकर केन्द्र रांची की पीठ थपथपा चुका है, लेकिन स्वच्छता की कहानी यहां थोड़ी उलटी है. कचरे के ढेर से रांची को अभी तक निजात नहीं मिल सकी है. और इन्हीं कचरों के ढेर ने रांची को मुसीबत में डाल दिया है. मच्छरों का आतंक तो यहां पहले से ही था, लेकिन राजधानी रांची को पहली बार चिकनगुनिया और डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियों से दो-चार होना पड़ा.

    सराहनीय :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    रांची की तीन महिलाओं ने बेबसी को बनाया हथियार. बैट्री रिक्शा के सहारे चला रहीं परिवार की गाड़ी. आज महिलाएं किसी पर बोझ नहीं हैं और न महिलाओं को यह स्वीकार है कि कोई उन्हें परिवार पर बोझ समझे. सुमन देवी, संतोषी मुंडा और जानकी कुमारी मुंडा जैसी महिलाओं ने यह साबित कर दिखाया है कि कोई भी मुसीबत उनके इरादों को तोड़ नहीं सकती. कहने को तो ये तीनों महिलाएं बैटरी रिक्शा चलाती है, लेकिन इसे अपने लिए गर्व का विषय समझती है, क्योंकि इससे वे न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं, बल्कि इसके सहारे वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के सपने बुन रही हैं.

    हुनर :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    पन्ना लाल में पक्षियों के प्रति अजब की दीवानगी है. पक्षियों के साथ रहते-रहते उन्होंने न सिर्फ उनकी बोलियों की नकल करने लग गये हैं, बल्कि वे पक्षियों के साथ उनकी आवाज में बातें भी करते हैं. उनका यह हुनर अब तो लोगों को दीवाना बनाने लगा है. आज आलम यह है कि उनके कद्रदानों में लिस्ट में आम लोगों के साथ खास लोग भी शामिल हो गये है. 'बर्ड मैन' के नाम से विख्यात हो चुके पन्ना लाल अपने इस हुनर से लोगों को दीवाना तो बनाते ही हैं, लेकिन उनका असल मकसद अपने इस हुनर के माध्यम से लोगों को प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण का संदेश देना.

    समस्या :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    झारखंड वनों से आच्छादित विशाल क्षेत्र है. इस वन क्षेत्र में कई जनजातियां वर्षों से, कई पीढ़ियों से रहती आ रही हैं. यह सही है कि सरकार ने इन जनजातियों के उसी वन क्षेत्र में, जहां वे वर्षों से रहते आये हैं, रहने की व्यवस्था की है, बावजूद इसके इन जनजातियों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिन पर उस क्षेत्र को खाली करने का दबाव वन विभाग द्वारा डाला जा रहा है, क्योंकि वन विभाग इसे वन क्षेत्र मान रहा है. चतरा के जंगलों में रह रहे आदिवासियों के सामने ऐसी ही समस्या आन पड़ी है.

    नया प्रयास :

    2018-11-10

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    समय के साथ झारखंड में भी कृषि ने व्यापार का रूप ले लिया है. झारखंड के किसान भी आधुनिक तरीके अपना कर अपनी कृषि उत्पादों के लिए नये बाजार की तलाश करने लगे हैं. राज्य का किसान आज ऑनलाइन व्यापार से जुड़ गया है. यह एक अच्छी शुरुआत है. इससे किसान को अतिरिक्त प्रयास से भी बच जाते हैं और उनके उत्पाद को भी बाजार मिल जाता है.

    पहल :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ब्रजेश राय

    image

  • image

    झारखंड सरकार ने राज्य कर्मचारियों को रक्तदान के प्रति प्रेरित करने के लिए एक अनोखी पहल की है। रक्तदान करने वाले राज्य कर्मचारिओं के लिए चार दिनों के आकस्मिक अवकाश का सरकारी प्रावधान किया गया है। दरअसल, राज्य सरकार राज्य में रक्तदान करने वालों की संख्या को देखते हुए यह कदम उठाया है। यह समस्या राज्य की ही नहीं, पूरे देश की है। भारत में कुल जनसंख्या के अनुपात में एक प्रतिशत आबादी भी रक्तदान नहीं करती है। जबकि दूसरे देशों में थाईलैण्ड में 95 फीसदी, इंडोनेशिया में 77 फीसदी और म्यांमार में 60 फीसदी हिस्सा रक्तदान से पूरा होता है। भारत में मात्र 46 लाख लोग स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं। इनमें महिलाएं मात्र 6 से 10 प्रतिशत हैं।

    अव्यवस्था :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-वरुण सिन्हा

    image

  • image

    रांची का रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। वर्तमान में यह अस्पताल मानव अंगों का गोदाम बना हुआ है। दरअसल, पोस्टमार्टम के लिए शवों को यहां लाया जाता है, आगे की जांच के लिए शवों के विसरे सुरक्षित रख लिए जाते हैं। लेकिन आगे की कार्यवाही यह है कि जांच के बाद इन्हें नष्ट भी कर दिया जाता है। परन्तु इसकी एक प्रक्रिया है। समुचित दिशा-निर्देशों के अभाव में अस्पताल इन्हें नष्ट नहीं कर पा रहा है। यानी ये विसरे भूले-विसरे हो गये हैं। कुल मिलाकर इन विसरों को अस्पताल को सौंपकर पुलिस तो निश्चिंत है, मगर रिम्स का काे-फारेंसिक मेडिसिन विभाग इसे लेकर परेशान है।

    पशुपालन :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-प्रमोद जायसवाल

    image

  • image

    झारखंड की जनजातीय महिलाएं अब जंगलों से सिर्फ लकड़ियां लाने का काम नहीं करतीं, बल्कि भेड़, बकरी और मुर्गियों जैसे छोटे पशु पालकर ये आर्थिक रूप से सबल होने का प्रयास भी कर रही हैं। झारखंड में खेती और पशुपालन रोजगार का प्रमुख जरिया है। बकरी पालन तो ग्रामीणों के लिए एक सहज व्यवसाय बन गया है। इसका कारण पहला यह है बकरी पालन में ज्यादा पूंजी की आवश्यकता नहीं होती, फिर रखरखाव पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देना पड़ता है। इस व्यवसाय में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी काफी बढ़ी है।

    शुरुआत :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-उपेन्द्रनाथ पांडेय

    image

  • image

    देसी नस्ल की गायों का महत्व देश में वर्षों से रहा है, कारण इसका दूध और इसके दूध से बने उत्पादों में विशेष गुणों का समावेश होना. देसी गायों के दूध, घी, दही आदि का इस्तेमाल रोगों से लड़ने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है. इन देसी गायों में सौराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान में पायी जाने वाली गिर गायों का विशेष महत्व है. अब तो इन गिर गायों के शुभ चरण रांची में भी पड़ गये हैं.

    अकल्पनीय :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-उपेन्द्रनाथ पांडेय

    image

  • image

    प्राकृतिक रचनाधर्मिता और संवेदनशीलता की मिसाल हैं गिर गायें प्राचीन काल से ही भारत में गौ पालन की विशिष्ट परम्परा रही है। यही कारण है कि आज भारत दूध उत्पादन में विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है। लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है देश में गौ का स्थान। अपने विशिष्ट गुणों के कारण ही शायद गायें भारतीय जन-जीवन में विशेष स्थान रखती हैं। इन गायों में देश की प्राचीन देसी गिर गायों के गुण तो उन्हें दूसरी देसी गायों से पृथक करते हैं।

    जज्बा :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    गढ़वा जिले के आदिम जनजाति से आने वाले अनुरंजन समद की जिद है कि वे जिन्दगी को अपने तरीके से जीएंगे. आदिम जनजाति का पारम्परिक पारम्परिक पेशा उन्हें रास नहीं है इसलिए वे सदियों से चली आ रही आदिम परम्परा से बाहर निकल कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाह रहे हैं. उनका मानना है कि जब उन जैसे लोग जंगलों से बाहर निकलेंगे तभी देश-दुनिया हो रहे बदलावों को महसूस कर पायेंगे. साथ ही उन जैसे औरों के लिए प्रेरणा बन पायेंगे.

    दृढ़-संकल्प :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-रूपेश साहु

    image

  • image

    जब हौसलों की बात हो तो महिलाएं भी उदाहरण पेश करने में मर्दों से पीछे नहीं रहतीं. रांची की दो महिलाओं ने भी यह महिलाओं के लिए प्रयोग होने वाले अबला शब्द को गलत साबित किया है. इनमें से एक महिला ने जीवन में आये झंझावत से उबर कर उन जैसों के लिए प्रेरणा का काम कर रही है दूसरी महिला ने समाज से तिरस्कृत वर्ग को हारने नहीं देने का संकल्प उठा रखा है.

    फरियाद :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    गरीबों की फरियाद सरकार सुनती है. लेकिन जब सरकार तक ही इन गरीबों की फरियाद नहीं पहुंच सके तो उनका क्या होगा. लातेहार के गरीब अपने अन्नदाता से फरियाद लगा रहे हैं कि उनके स्वागत के लिए उन्होंने जो खून-पसीना बहाया है उसकी कीमत उन्हें मिल जाये ताकि उनके दो जून की रोटी का जुगाड़ हो सके. परन्तु अभी तक उनकी फरियाद सरकार के कानों तक नहीं पहुंची है.

    सरकारी पहल :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-रूपेश साहु

    image

  • image

    देश में रोजाना सैकड़ों नवजात शिशु को सड़क किनारे, गटर में व कचरों के ढेर पर फेंक दिया जाता है. ऐसे बच्चे कोख से जन्म तो जरूर लेते हैं, लेकिन गोद से महरूम रह जाते हैं. इस कारण इनमें से अधितकर बच्चे घटनास्थल पर दम तोड़ देते हैं या फिर शिशु अवस्था में ही मर जाते हैं.

    सराहनीय :

    2018-11-09

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    किसी की मदद करने के लिए केवल उपयोगी वस्तुएं ही नहीं पर्याप्त नहीं होता, बल्कि घर में बची हुई दवाइयां भी लोगों की मदद पहुंचा सकती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ये दवाइयां किसी के जीवन रक्षक का काम कर सकती हैं. समाज में ऐसे कई लोग हैं जो दवाइयों के अभाव में अपना समुचित इलाज नहीं करा सकते. इसी को ध्यान में रखकर रांची के विद्यार्थियों के एक समूह ने इस नेक काम का जिम्मा खुद उठाया है. ये घर-घर जाकर दवाइयां इकट्ठी करते हैं और जरूरतमंदों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

    परोपकार :

    9.10.2018

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-मो. असगर खान

    image

  • image

    मैक्स फाउंडेशन दुनिया भर में रक्त कैंसर और दुर्लभ कैंसर से जूझ रहे मरीजों के जीवन में सुधार लाने के लिए समर्पित है. द मैक्स फाउंडेशन की सोच है कि सभी कैंसर रोगियों को पास सर्वोत्तम उपचार, देखभाल और समर्थन उपलब्ध हो सके. संस्था इस दुर्लभ रोग से ग्रसित उन मरीजों के लिए संजीवनी का काम कर रही है जो अत्यधिक महंगी दवाओं के कारण अपने जीवन से निराश हो चुके होते हैं. संस्था का ध्यान दुनिया भर में विकासशील देशों और वंचित आबादी में परिवारों की सेवा करने पर है. विकासशील देशों में कैंसर के कलंक को कम करना मैक्स फाउंडेशन का प्राथमिक क्षेत्र है.

    कृषि :

    9.10.2018

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-मो. असगर खान

    image

  • image

    झारखंड के दो अलग-अलग गांव के किसान अपनी आनोखी फसल को लेकर इन दिनों काफी सुर्खियों में है. वजह इनके द्वारा लगाए सेब के पेड़ों में फलों का आना है. राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एयपोर्ट के पास बसा छोटा घाघरा और रामगढ़ जिला के संग्रामपुर पंचायत का सरलाकलां गांव खेती नई इबारत लिख रहा है. यहां के रहने वाले रॉबर्ट एक्का और बौंड़ी महतो के परिश्रम ने आखिरकार परिणाम दे ही दिये. दरअसल, दोनों ने गर्मी के दिनों में औसतन 30-35 डिग्री तापमान वाले क्षेत्र में सेब को उगाकर दिखाया है.

    समस्या :

    03-10-2018

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ए. खान

    image

  • image

    झारखंड वनों से आच्छादित विशाल क्षेत्र है. इस वन क्षेत्र में कई जनजातियां वर्षों से, कई पीढ़ियों से रहती आ रही हैं. यह सही है कि सरकार ने इन जनजातियों के उसी वन क्षेत्र में, जहां वे वर्षों से रहते आये हैं, रहने की व्यवस्था की है, बावजूद इसके इन जनजातियों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिन पर उस क्षेत्र को खाली करने का दबाव वन विभाग द्वारा डाला जा रहा है, क्योंकि वन विभाग इसे वन क्षेत्र मान रहा है. चतरा के जंगलों में रह रहे आदिवासियों के सामने ऐसी ही समस्या आन पड़ी है.

    समस्या :

    02.07.2018

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-रेणु प्रकाश

    image

  • image

    बिहार से अलग से होने की जंग तो झारखंड जीत गया, लेकिन कई मोर्चों पर उसकी जंग अभी बाकी है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण जंग है कुपोषण के खिलाफ। खासकर बच्चों में कुपोषण की स्थिति काफी भयावह है।

    विरोध :

    22.06.2018

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-मो. असगर खान

    image

  • image

    ग्राम विकास समिति और आदिवासी विकास समिति के गठन को लेकर विरोध के स्वर अब पंचायत से सड़कों तक दिखने लगे हैं. मुखिया और ग्रामसभा के लोग सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं जानकारों का कहना है कि सरकार की ओर से ग्राम स्तर पर विकास एवं किसी अन्य नाम पर समिति का गठन किया जाना गैर संवैधानिक है. कानून के मुताबिक इस तरह की कमेटी के गठन का अधिकार ग्रामसभा को है. ग्राम विकास समिति और आदिवासी समिति का गठन बेवजह और झारखंड पंचायती राज्य अधिनियम (2001) के खिलाफ मानते हैं.

    सामाजिक दंश :

    22.06.2018

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-मो. असगर खान

    image

  • image

    मागो हमारी आदि काल से चला आ रही प्रथा है. हमारे पूर्वजों का सम्मान है. ये कहते समय में खूंटी के बियाकेल गांव के 78 वर्षीय ग्राम प्रधान रायफोर टोप्पनो की l त्योरी चढ़ आती है. आदिवासी समाज में मागो एक प्रथा है जिसे समाज में बहुत ही नाकारात्मक नजारिये देखा जाता है.

    मिसाल :

    22.06.2018

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-दयानन्द राय

    image

  • image

    जड़ी-बूटियों पर अनुसंधान कर रोगियों का कल्याण कर रहे डॉ सुरेश अग्रवाल। सुरेश अग्रवाल ने अपने घर के बागीचे में न सिर्फ भांति-भांति के मेडिसीनल प्लांट लगा रखे हैं, बल्कि अपने घर को भी इन्होंने जड़ी-बूटियों की प्रयोगशाला बना ली है।

    छोटा नागपुर संशोधन विधेयक 2016 :

    23.02.2017

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक- राजू मुर्मू

    image

  • image

    संविधान की पांचवी अनुसूची अनुच्छेद 244(1) के अनुसार प्रत्येक राज्य में जहाँ अनुसूचित क्षेत्र है एक ‘ जनजाति सलाहकार परिषद’ की स्थापना होनी चाहिए। जिसके सदस्यो की संख्या 20 से काम नहीं होनी चाहिए और जिसमे तीन चौथाई सदस्य राज्य के विधान सभा के आदिवासी विधायक होंगे।

    मिसाल :

    14-02-2017

    तस्वीर द्वारा- विकास सिन्हा

    लेखक-विकास सिन्हा

    image

  • image

    गांव के झगड़े गांव में ही सुलझा लिये जायें, तो यकीनन थानों और अदालतों पर से मुकदमों को बोझ घटेगा. गांव के लोगों का मुकदमेबाजी में लगने वाला अनावश्यक खर्च भी बचेेगा.

    मानवाधिकार का हनन :

    04-02-2017

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ज्यां द्रेज

    image

  • image

    बस्तर(छत्तीसगढ़) में कानून का पालन हो, इलाके में मानवाधिकार के हनन के शिकार किसी भी व्यक्ति तक कोई पहुंचना चाहे तो उसे बाधा ना पहुंचायी जाय और बाधा पहुंचाने वाले लोगों या किसी अन्य मानवाधिकार का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाय.

    गांव की बेटियों के हौसले :

    30-01-2017

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-जीवेश रंजन सिंह

    image

  • image

    अब बेटियां सिर्फ आंगन की शाेभा नहीं रहीं. गर्भ से लेकर गली-मोहल्ले तक के खतरों से लड़ती-भिड़तीं ये ललनाएं अपनी किस्मत खुद लिखने में विश्वास कर रही हैं. अोलिंपिक से लेकर स्कूल तक की प्रतियोगिता में खुद को साबित करती बेटियों ने यह बता दिया है कि अगर उन्हें मौका दिया नहीं गया, तो वो छीन कर अपनी राह बना लेंगी.

    मिनी लन्दन : मैकलुस्कीगंज :

    21-01-2017

    तस्वीर द्वारा- गोपी चंद चौरसिया

    लेखक-गोपी चंद चौरसिया

    image

  • image

    झारखण्ड की राजधानी रांची से उतर- प. में करीब 55 कि.मी दूर स्थित है एक क़स्बा गाँव है मैकलुस्कीगंज. एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए बसाई गई दुनिया कि इस बस्ती को मिनी लन्दन भी कहा जाता है.

    रोजगार :

    20-01-2017

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-एमपी कुरैशी

    image

  • image

    अभी कुछ दिन पूर्व ही खूंटी जिला के तोरपा प्रखंड जाना हुआ. तोरपा प्रखंड कार्यालय से पक्की सड़क होते हुए लगभग दस किलोमीटर तक पहुंचने के बाद करीब 15 किलोमीटर दूर कच्ची व संकीर्ण मार्ग तय करते हुए बरकोली पंचायत के मालादोन गांव पहुंचे. इस गांव में लगभग बीस से पच्चीस मिट्टी के घर हैं, जिसमें करीब डेढ़ सौ लोग रह रहे हैं.

    करम पर्व : झारखण्ड का कृषि पर्व :

    16-01-2017

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-मेघा शिरोमणि किरो

    image

  • image

    झारखण्ड के सर्वाधिक लोकप्रिय पर्वों में से एक है करम पर्व. सामूहिकता, बंधुत्व तथा भाई- बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक पर्व. करमा भादो के ऐसे माह में मनाया जाता है, जब प्रकृति कि हरियाली पर सभी मोहित हो रहे होते है. करमा प्रकृति की सहजता और बहुरंगी धार्मिक आस्थाओं का समागम है.

    महिला सशक्तिकरण :

    10.1.2017

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-मेघा शिरोमणि किरो

    image

  • image

    परिदृश्य बदल रहा है महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही है महिला सशक्तिकरण हो रहा है ये कुछ चुनिन्दा पंक्तिया है जो यदा कदा अखबारों में टीवी न्यूज़ चैनेल पर और नेताओं के मुंह से सुनने को मिल जाता है अपने क्षेत्र में खास उपलब्धियाँ हासिल करने वाली कुछ महिलाओं की उन्नति को दर्शाता है पर आप धयान दें तो कुछ अद्भुत काम करने वाली महिलाएं तो हर काल में रही है सीता से लेकर दौप्रदी,रजिया सुल्तान से लेकर दुर्गावती,रानी लक्ष्मीबाई से लेकर इंदिरा गाँधी एवं किरण बेदी से सानिया मिर्ज़ा तक.

    जन सरोकार :

    07.12.2016

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-अर्चना दत्तास

    image

  • image

    सड़कों पर तेज गति से भागती हुई लंबी कारें किसी की परवाह किए बिना दौड़ रही हैं। सरकारी और गैर सरकारी सर्वे यह बता रहे हैं कि प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटना में बढोत्तरी हो रही है। भारत का नाम दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिनका सड़क सुरक्षा के मामले में बेहद खराब रिकार्ड है। देश में प्रत्येक वर्ष पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और दुर्घटनाओं के कारण तक़रीबन 1,42,000 लोग दम तोड़ देते हैं, पांच लाख से ज्यादा घायल और कितने ही ज़िन्दगी भर के लिए अपंग।

    खेती-खलिहान :

    07.12.2016

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-पांडुरंग हेगडे

    image

  • image

    गैर-विवेकपूर्ण तरीके से उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरकता में कमी आती है जिसके फलस्वरूप मिट्टी के सूक्ष्म तथा सूक्ष्मतर पोषक तत्वों में कमी हो जाती है और कृषि पैदावार में भी कमी आ जाती है। इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पैदावार को बढ़ावा देने के लिए देश भर में मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है। “वंदे मातरम्” गीत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “सुजलाम और सुफलाम” के सही मायने को चरितार्थ करने के लिए हमें मिट्टी की सेवा और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाना आवश्यक है।

    अभिशासन :

    07.12.2016

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुधीर पाल, पत्रकार

    image

  • image

    केन्द्र की मोदी सरकार उन छहों राजनीतिक दलों के बचाव में कमर कसकर मैदान में है, जिन्हें राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त है और केन्द्रीय सूचना आयोग ने सरकारी अनुदान, जमीनों के अनुदानित आवंटन इत्यादि के चलते उन्हें सार्वजनिक संस्थान करार दिया हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिका पर राजनीतिक दलों के जवाब से पहले स्वयं सरकार शपथपत्र देकर यह कह चुकी है कि राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने से दलों के संचालन में बाधा आएगी।

    अभिशासन :

    03.12.2016

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-जगदीप छोकर

    image

  • image

    अर्थव्यवस्था की सफाई के लिए विमुद्रीकरण जैसा सख्त कदम उठा कर सरकार जहां एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर लोकपाल की नियुक्ति में हो रही देरी पर उच्चतम न्यायालय ने सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं. दरअसल, ढाई वर्ष का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी सरकार लोकपाल के लिए पांच सदस्यीय चयन समिति का गठन नहीं कर सकी है. नेता विपक्ष का नहीं होना ही सरकार का एक मात्र जवाब है.

    अधिकार हनन :

    28.11.2016

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक- मेघा शिरोमणि किडो

    image

  • image

    झारखण्ड राज्य के गढवा जिले में वन भूमि पर लोगों द्वारा अपनी आजीविका के लिए किये गए दखल को अवैध कब्जा बताकर हटाने की जो मुहिम वन विभाग द्वारा चलाई गई है वह पूरी तरह से वनाधिकार कानून 2006 की अवमानना है. गढवा जिला, भंडरिया प्रखंड के ग्राम सीजो में 7 अक्टूबर 2016 को वन विभाग के द्वारा जेसीबी मशीन के द्वारा आदिवासियों के 24 घरों को ध्वस्त कर दिया गया. उन्होंने न सिर्फ घरों को ध्वस्त किया, बल्कि उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाया.

    ग्राउंड जीरो से :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुधीर पाल

    image

  • image

    • ग्रामीण इलाकों कि ३५० लड़कियों की माएं सम्मानित • हर लड़की के जन्म होने पर उसके परिवार को तोहफा • ग्राम पंचायत साल में कम-से-कम एक दर्जन लड़कियों का जन्मदिन मनाएगी

    सुकन्या समृद्धि खाता :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-आमिर अमीन नौशहरी

    image

  • image

    लड़कों को प्राथमिकता देने वाली रुढि़वादी और गलत मानसिकता के कारण कुछ लोग कन्‍या भ्रूण हत्‍या कर देते हैं। इसके कारण देश में लैंगिक अनुपात में असमानता पैदा होती है। 2011 की जनगणना के अनुसार बाल लिंग अनुपात 914 दर्ज किया गया, जो स्‍वतंत्रता के बाद न्‍यूनतम है।

    मारवाड़ी महिलायें :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुधीर पाल

    image

  • image

    घटते शिशु लिंगानुपात के मद्देनज़र बोकारो की महिलाएं कन्या जन्मोत्सव मना रहीं हैं. प्रधान मंत्री के बेटी बचाओ, बेटी पढाओ अभियान में बोकारो जिला शामिल नहीं है लेकिन मारवाड़ी महिला समिति ने इस अभियान को बोकारो में महिला अस्मिता से जोड़ दिया है. समिति की वरीय सदस्य गंगा देवी भालोटिया कहती हैं २०११ की जनगणना रिपोर्ट में बोकारो का आंकड़ा बहुत ही बदतर है. यहाँ प्रति १००० शिशु पर कन्या शिशु की संख्या मात्र ९१२ है. कन्याओं के प्रति अब भी हमारे खयालायत अच्छे नहीं हैं.

    ग्राउंड जीरो से :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुधीर पाल

    image

  • image

    गढ़वा जिले के मेराल ब्लॉक के पोलोदोहा गाँव के मनरेगा मजदूर रामजी भुइयां को इस भीषण गर्मी में छावं और पीने के पानी की तलाश है. २००९ से मनरेगा में मजदूरी कर रहे रामजी को अब भी आस है कि मनरेगा कानून के इन प्रावधानों का अनुपालन होगा. झारखण्ड सहित ज्यादातर राज्यों में कार्यस्थल पर छायादार शेड, पेयजल, मेडिकल किट और बच्चों के लिए क्रेच की व्यवस्था नहीं हो पाई है. मनरेगा कानून के मुताबिक ०-६ वर्ष के हर पांच बच्चों की कार्यस्थल पर देखरेख के लिए एक महिला मजदूर रखने का प्रावधान है. विभाग का मानना है कि इतने बच्चे होते ही नहीं हैं कि क्रेच की व्यवस्था की जाए.

    पहाड़ :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुधीर पाल

    image

  • image

    ओरमांझी के गगारी पंचायत की मुखिया सुनीता देवी एक बार गगारी पहाड़ को निहारती है और कहती है- ब्रिटिश काल से यह नंगा है .यह पहाड़ हमारे पुरखों की यादों को समेटे हुए है और अब हम इसे बिन पेड़ के पहाड़ नहीं होने देंगे.

    तीन तलीय खेती :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुधीर पाल

    image

  • image

    किसानों ने एक करोड़ २० लाख के लाह बेचे इमारती लकड़ियों, सब्जी एवं धान की एक साथ खेती नमी बनाये रखने के लिए पांच फीट गुना पांच फीट के गड्ढे बनाये गए

    जेपी :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-विनोद कुमार

    image

  • image

    झारखंड के आदिवासी इलाके को अपना ठिकाना बनायाण् इसके बाद प्रिंट मीडिया में चले आए और प्रभात खबर के साथ जुड़कर जनपक्षीय पत्रकारिता का अर्थ ढूंढने लगेण् देशज सवालों पर रांची से प्रकाशित ष्देशज स्वरष् मासिक पत्रिका के संपादक भी रहे जिसके आदिवासी.देशज विषयक अंक खासे चर्चें में रहेण् बहरहालए पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और मीडिया के दोहरेपन से संघर्ष की लंबी पारी खेलने के बाद अब उपन्यास लिख रहे हैंण् झारखंड आंदोलन पर ष्समर शेष हैष् और ष्मिशन झारखंडष् उनके दो चर्चित उपन्यास हैं

    संताल परगना :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-डा0 सुरेन्द्र झा

    image

  • image

    संताल परगना के भू-राजस्व कानून अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। बंगाल और बिहार के रैयती कानूनों से भिन्न होने के साथ-साथ ये कानून छोटानागपुर के कानूनों से भी भिन्न हैं।

    पत्रकार :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-

    image

  • image

    हाल में छत्तीसगढ़ के जेलों में बंद दो पत्रकारों से मिलने का मौक़ा मिला | उनमें से एक ने कहा “मैं नक्सलियों को अखबार पहुंचाता था और वो उसके बराबर पैसे भी देते थे | मुझे पुलिस ने भी पैसे दिए पर मैंने उनको भी कोई जानकारी नहीं दी” | “मैं जिन अखबारों के लिए काम करता हूँ वो मुझे कोई तनख्वाह नहीं देते तो अपनी आजीविका के लिए मैं ठेकेदारी जैसे छोटे मोटे काम करता हूँ | हम जिस तरह के इलाके में रहते हैं वहां ज़िंदा रहने के लिए आप को यह सब करना ही पडेगा | आप दरिया में रहकर मगरमच्छ से बैर नहीं ले सकते” |

    आदिवासी :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ग्लैडसन डुंगडुंग

    image

  • image

    आज पूरी दुनियां जलवायु संकट (इंकोलोजिकल क्राईसिस) के दौर से गुजर रहा है। असमयिक वर्षा, बर्फबारी और असहनीय गर्मी के से जनजीवन अस्त-व्यस्त है और दुनियां के विकसित देश चिंतित हैं लेकिन हमारे देश की सरकार को सिर्फ पूंजीनिवेश की चिंता है। देश में सिर्फ 21 प्रतिशत जंगल बचा हुआ है जबकि पर्यावरण संतुलन बनाये रखने के लिए हमें कम से कम 33 प्रतिशत चाहिए। बावजूद इसके विकास एवं आर्थिक तरक्की के नाम पर पेड़ काटने और जंगल उजाड़ने का काम जारी है।

    आदिवासी :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुनील मिंजए सामाजिक

    image

  • image

    अनुसूचित जनजाति उपयोजना (ज्ैच्) और अनुसूचित जाति उपयोजना (ैब्ैच्) में जनसंख्या के अनुपात में बजट का आवंटन नहीं हो पा रहा है। बजट के आवंटन होने पर भी इस राशियां का उपयोग अनुसूचित जनजाति और अनुसूचि जाति के समुदायां के विकास के लिए नहीं किया जा रहा है। इस पैसों का डाइवर्सन कर दिया जा रहा है। 34 वें राष्ट्रीय खेल के लिए इसकी राशि का डाइवर्सन सबसे अच्छा उदाहरण है।

    रातू किला :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-

    image

  • image

    150 वर्षो से पौराणिक विधि से हो रही दूर्गा पूजा ऽ वक्त के साथ और गहरी हुई आस्था की जड़ें ऽ 19वीं शताब्दी के सातवें दशक में हुई थी परम्परा की शुरुआत ऽ यहां की पूजा देखने छतीसगढ़, उडीसा, बंगाल से आते हैं लोग रातू। रातू किले में शारदीय नवरात्र पर अनूठा माहौल रहता है।

    जाति :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-

    image

  • image

    ‘क’ और ‘ग’ दो व्यक्ति है, दोनों के बीच किसी बात का लेकर विवाद हो जाता है ‘ग’ जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है ‘क’ जो अनुसचित जाति एवं अनुसूचित जाति का सदस्य है को उस विवाद में उसकी जाति को लेकर अपश्ब्द बोलता है या उसके जाति का नाम लेकर अपमानित करता है तो ‘ग’ अनुसूचित जाति एंव अनुसूचति जनजाति ;अत्याचार निरोधकद्ध अधिनियम, 1989 के तहत दोड्ढी होगा।

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सत्येन्द्र कुमार सिं

    image

  • image

    भारत में आजादी के पश्चात् ‘‘विकास’’ शब्द की अन्धड़-तूफान प्रत्येक लोकसभा, विधान सभा एवं पंचायती राज चुनावों के साथ चलती है। वैसे भारतीय जन-मानस के दिलो-दिमाग पर ‘‘विकास’’ शब्द-वाण निरन्तर गुंजते रहता है। ‘‘संस्कृति’’ एक भौगोलिक क्षेत्र एंव गाँव की साझी होती है। जिसमें समाज के सभी वर्गां/समुदायों की साझीदारी, भागादारी, जिम्मेवारी एवं जवाबदेही सुनिश्चित होता है।

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सत्येंद्र रंजन

    image

  • image

    1970 के दशक में बड़े होते हुए यह चर्चा हम अक्सर सुनते थे कि कहां श्विकासश् पहुंचा है और कहां नहीं। तब इसका तात्पर्य अक्सर सड़क और बिजली से होता था। अगर आसपास कोई फैक्टरी लग गई हो या रेल लाइन भी पहुंच गई होए तो उस स्थान को और भी ज्यादा श्विकसितश् बताया जाता था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो उस दौर में श्विकासश् को मापने का एकमात्र पैमाना सकल घरेलू उत्पाद की मात्रा थी।

    अभिव्यक्ति :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-आलोका

    image

  • image

    जितना उंचा पहाड़ उतनी उंची हमारी संस्कृति, जितनी लम्बी नदियां उतना लम्बा हमारा इतिहास, कला संस्कृति लोगां के सामाजिक जीवन को अभिव्यक्ति से जुड़ा है। सुख, दुःख, विवाह, त्यौहार, श्रम, जन्म, मृत्यू तक लोग की कला संताल समाज में उभर कर आती है। जिसमें लोगकला के पहलू और कल्पना से उकेरे तमाम पहलू को अभिव्यक्त करती है। संताल समाज कल्पनाशील होने के साथ वे प्रकृति प्रेमी भी है। सामूहिक जीवन शैली के तमाम पहलू पर पैनी नजर है उनके कला में देखने को मिलता है।

    लेखक :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-शैलेन्द्र कुमार सिन्

    image

  • image

    पिछले 15 वर्षों से ग्रासरूट जर्नलिस्ट के रूप में झारखंड के ग्रामीण समस्याओं पर मेरे आलेख देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में चरखा,नई दिल्ली के माध्यम से प्रकाशित हुए हैं।

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-राजीव करण

    image

  • image

    किसी भी राष्ट्र की मूल शक्ति उसके शिक्षित और साक्षर नागरिक होते हैं जो उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा आर्थिक विकास के मूल उपादान भी हैं। विशेष रूप से भारत के सामाजिक विकास में साक्षरता का विशेष महत्व है। विकास के मानकों में मानव विकास सूचकांक का महत्व सर्वप्रथम है तथा शिक्षा और साक्षरता इसके अंतर्गत एक तय मानक है।

    कुरमाली :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-डॉ० राजा राम महतो

    image

  • image

    कुरमाली एक अन्तर प्रान्तीय भाषा है। इसका विस्तार क्षेत्र ‘‘उड़िष्य षिखर, नागपुर, आधा-आधी खड़गपुर‘‘ लोकाक्ति से ज्ञात होता है। कुरमाली का क्षेत्र राजनीतिक मानचित्र द्वारा परिसीमित नहीं किया जा सकता। यह केवल झारखण्ड ही नहीं बल्कि प० बंगाल के पुरूलिया, बाँकुड़ा, मिदनापुर, उड़िसा राज्य के क्योंझार, बोनई, बामड़ा, मयुरभंज, सुन्दरगढ़, आसाम के डिबरूगढ़ जिला, बिहार के पुर्णिया जिला के दमदाहा प्रखण्ड का भाव विनिमय का माध्यम कुरमाली ही है।

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-राहुल सिंह

    image

  • image

    इस देश में शब्दों की अर्थवत्ता का सबसे ज्यादा अवमूल्यन राजनीतिज्ञों ने किया है। ऐसे शब्दों की लम्बी सूची है, हाल के दिनों में जो शब्द इस अवमूल्यन का शिकार हुआ है, वह ‘विकास’ है। विकास के दिगन्तव्यापी शोर के तलहटी में जाकर देखें तो मालूम होता है कि यह मूलतः एक आर्थिक गतिविधि है।

    स्ांताली भाषा :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-शैलेन्द्र सिन्हा

    image

  • image

    साहित्य को अंर्तराष्ट्र्रीय पहचान दिलायी पी ओ बोडिंग स्ांताली भाषा के ओलचिकी लिपि में अब मुद्रित होंगेंं भारतीय रूपये स्ांताली भाषा,साहित्य के इतिहास में रेवरेन्ड पाउल ओलॉफ बोडिंग (पी ओ बोडिंग) का नाम अमर है।उन्होंने संताली लोक साहित्य,अनुवाद,शब्दकोश,पत्रकारिता के क्षेत्र में अनेक कार्य किये और संताली साहित्य को अंर्तराष्ट्रीय पहचान दिलायी।

    झारखण्ड :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-केशव कुमार भगत

    image

  • image

    स्वर्णरेखा उद्गम स्थल के रूप में संपूर्ण भारतवर्ष में पहचान बनाने वाला ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगम की नगरी-पिस्का नगड़ी-वर्तमान में डिजिटल इंडिया के तहत आनलाइन रसीद के लिये आधुनिक नगड़ी बन कर देश के मानचित्र पर छा गया। देश का पहला है प्रखण्ड है नगड़ी जहां आनलाइन रसीद कटना आरंभ हुआ जबकि आनलाइन म्यूटेशन (दाखिल खारीज) का यह दूसरा प्रखण्ड है।

    परिचय :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-घनश्याम

    image

  • image

    1974 के छात्रा-आंदोलन में सक्रिय भागीदारी एवं छात्रा युवा संघर्ष वाहिनी के सक्रिय सदस्य। ऽ 30 सितम्बर, 1974 में ‘मीसा’ में बंदी एवं पुनः आपातकाल के दौरान ‘मीसा’ एवं ‘डीआईआर’ में बंदी।

    मनरेगा :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-

    image

  • image

    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक मांग आधारित योजना है जिसमें अकुशल श्रम के इच्छुक एवं अधिनियम के अंतर्गत निबंधित ग्रामीण परिवारों को साल में सौ दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। मनरेगा 2005 के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रथम चरण में दिनांक 2 फरवरी 2006 को राज्य के तत्कालीन 20 जिलों में (देवघर और प0 सिंहभूम छोड़कर) लागू किया गया।

    अल्पसंख्यक वर्ग :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-डा. नसरीन जमाल

    image

  • image

    एक अल्पसंख्यक वर्ग से संबंध रखती है और सामाजिक कार्य का जुनून है वह कमजोर समाज से जरूरतमंद और गरीब बच्चों , महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में काम करती है I

    जैविक खेती :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-ललन कुमार शर्मा

    image

  • image

    गिरिडीह जिला का परमाडीह गांव जैविक खेती के माध्यम से करोड़पति ग्राम बन चूका है गिरिडीह जिला का परमाडीह गांव जो गाण्डेय प्रखण्ड का एक सरकारी योजनाओं से उपेक्षित गांव है, ग्रामीणों के आपसी मेल-मिलाप, मेहनत एवं मात्र जैविक खेती के सहारे तीन-चार वर्षो में करोड़पति ग्राम बन गया है।

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-इन्दर सिंह नामधारी

    image

  • image

    संस्कृति का शाब्दिक अर्थ होता है शुद्धता या पवित्रता। यही कारण है कि संस्कृति शब्द के पहले जब कार्य या विकास जैसे सकारात्मक शब्द जोड़ दिए जाते हैं तो वे कार्य-संस्कृति या विकास-संस्कृति बनकर कार्य एवं विकास की पवित्रता के प्रतीक बन जाते हैं। इस तरह यदि हम विकास की संस्कृति का डी0एन0ए0 टेस्ट करें तो यह विकास की उस परिकल्पना का पर्याय बन जाएगा जहॉ विकास को पूरी ईमानदारी एवं पवित्रता के साथ सम्पादित किया जा रहा हो।

    गिरपतारी :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-

    image

  • image

    गिरपतारी किसी व्यक्ति को उसकी अपनी स्वंतत्रता से वंछित करने कि प्रक्रिया को बोलते है। साधारण तौर पर यह किसी अपराध की छानबीन के लिए लिए, किसी अपराध को घटने से रोकने के लिए या किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की हानि से रोकने के लिए किया जाता है। मानव अधिकारों की सार्वभौम घोड्ढणा में कहा गया है ”किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार, नजरबंद, या देष निप्कासि नहीं किया जाएगा।“

    झारखंड :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-घनश्याम

    image

  • image

    झारखंड में बनने वाली कृषि नीति ;जो अभी प्रस्तावित हैद्ध में समग्रता से विचार करने और यहां की संस्कृति तथा परम्परा पर ध्यान देने की जरुरत है। देश के अन्य भू-सांस्कृतिक ;जियो-कल्चरलद्ध क्षेत्रा से बिलकुल अलग है झारखंड का भू-सांस्कृतिक क्षेत्रा। यहां के लोग महज खेती को आजीविका के रूप में नहीं देखते बल्कि खेती को आजीविका के एक उपादान के रूप में उपयोग करते रहे हैं।

    आर्थिक :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-भारती

    image

  • image

    जुलाई 2016, भारत ने आर्थिक सुधारों के पच्चीस वर्ष पूरे कर लिये हैं। जुलाई 1991 में ही देष की कथित आर्थिक आजादी का सूत्रपात हुआ था। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है कि हम मुड़कर पिछले पच्चीस वर्षों को देखें कि इसके सबक क्या हैं और अगले पच्चीस वर्षों में देष को कौन सी नई मंजिलें पार करनी हैं।

    चदर-बदर :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-अषोक सिंह

    image

  • image

    प्रकृति ने जहाँ कला को विकसित करने का कौषल दिया है, वहीं बदलाव के इस दौर में उसके गुम या विलुप्त हो जाने के खतरे और उससे संबंधित कलाकृतियों को नष्ट करने के अवयव भी प्रदान किये हैं। ऐसे में उन अवयवों से कलाकृतियों एवं ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण जरूरी है।

    झारखण्ड भूमि :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-

    image

  • image

    झारखंड के कुल भौगोलिक क्षेत्र 423 वर्ग किलोमीटर के भीतर 74,715 वर्ग किलोमीटर 1927 ई. में वन के रूप में विस्तार किया गया है। वर्ष 1951 और 1995 के अनुसूचित क्षेत्रों से 6,260 वर्ग किलोमीटर एवं 1471 वर्ग किलोमिटर अनुसूचित गैर से विकास के नाम पर लिया गया ; औद्योगिक नीति और राष्ट्रीय राजमार्गों द्ध के अधिग्रहण करने और जहाँ 16000 वर्ग किलोमीटर कोयला और अन्य खनिज के लिये दिया गया ।

    आजीविका :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-विनाद कुमार

    image

  • image

    मानवीय गरिमा के साथ जीने के लिए आवश्यक है आजीविका, आजादी और आनंद. जीवन का आधार है आजीविका. यानी जीने के संसाधन- जल, जंगल, जमीन या ऐसा कोई ऐसा काम जिससे इतना अर्जन हो कि हम जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सकें. लेकिन मनुष्य जीवन के लिए सिर्फ इतना ही जरूरी नहीं. वह आजीविका के साथ आजादी की भी कामना करता है|

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक- अयोध्यानाथ मिश्र

    image

  • image

    बड़ी तेजी से वैश्विक-पारिस्थितिक परावर्तन हो रहा है। इसका परिणाम सबकुछ ठीक-ठाक हीं नहीं है। मान्यतायें (काल की कसौटी पर) टूट रही हैं, वर्जनायें विखर रही हैं, और चारों ओर इसके अच्छे बुरे फलाफल दिखाई दे रहे हैं। तेजी से बदलते परिवेश ने कुछ को बहा लिया, कुछ को झकझोर दिया है तो कुछ के चिंतन को विवश कर दिया है। शोर मचा हैं, विकास....... विकास........। आखिर यह ‘‘विकास’’ किसका, कितना और कैसा।

    अहिंसक :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-मनोनीत रेबेका तोपनो

    image

  • image

    ओ बिरसा, तुम्हारी बंशी और बेला का स्वर वन में थिरकन पैदा कर देता है। उसका रस लेने ... खूंखार पशु भी अपने-अपने घरों से निकल आते हैं।’ यह एक मुंडारी लोकगीत है। पुरखों ने इस गीत को उलगुलान काल में रचा है।

    प्रकृति :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-वंदना टेटे

    image

  • image

    चकोड़ा को जोरमेसिः घुड़लो सितिलते हो चकोड़ इघय केलोम योता कामे सेरे आजीडय कोबसोरेम कोबसोरेम रो मंडाः झोर तेरेम इस खड़िया पुरखागीत में भाभी से कहा जा रहा है- चकोड़ (चकवड़) साग गन्दूर गड्ढे के किनारे उगा है, कितना सुंदर दिख रहा है, भाभी तोड़ो और सुखाओ, सुखाकर मांड़ झोर देना।

    प्रतिरोध :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-बीजू टोप्पो

    image

  • image

    सिनेमा का मतलब लोग सीधे तौर पर हालीवुड और बालीवुड फिल्मों के मारधाड़, नाच- गान, डायलोग एवं मनोरंजन से जोड़ देते हैं, लेकिन इसका अर्थ सिर्फ मनोरंजन से नहीं होता.इसका व्यापक मतलब दर्शकों को सूचना देने , शिक्षित करने , और मनोरंजन करने से होता है. हालीवुड- बालीवुड जिसे हम मुख्यधरा की सिनेमा भी कहते हैं, जो हमें कल्पना पर जीना सिखाती है |

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-बसन्त हेतमसरिया

    image

  • image

    संभावना के अनुरूप विकास की महत्वाकांक्षा, शोषण की पीड़ा से मुक्ति और अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं को बचाए रखने के लिए झारखण्ड राज्य की मांग उठी और दशकों के संघर्ष और अनगिनत शहादतों के बाद अंततः सन 2000 में यह नया राज्य अस्तित्व में आया |

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-बाबा मायाराम

    image

  • image

    कुछ समय पहले जब देश के नक्शे पर तीन नए राज्यों का उदय हुआ तो विकास की उम्मीद जगी है। इनमें एक राज्य झारखंड था। यहां आदिवासियों की बड़ी संख्या है। इसे आदिवासी राज्य भी कहा जा सकता है। आदिवासियों के विकास और उनकी संस्कृति बचाने की बात होती रहती है। लेकिन आदिवासी और उनकी संस्कृति क्या है, इसे समझना जरूरी है।

    विकास :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-सुल्तान अहमद

    image

  • image

    शहर की खूबसूरत, गगन चुम्भी, विजली से जगमगाती इमारतों , लम्बे चौरे पुल ,चार लाइन वाली सडकें और उस पर दन दनाती गाड़ियों के हुजूम को देखकर तो ऐसा लगता है जैसे वाकई मैं हमारा देश अब बदल गया और अब यहाँ कोई गरीब नहीं रहता. आए दिन खबरें देखने और सुनने को मिलती की बीमारू राज्य बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा मध्य प्रदेश में गरीबी के कारन और स्वास्थ सुविधा के आभाव में गर्भ वती माताएं और नवजात शिशु प्रसव के दौरान ही दम तोर देते, वहीँ किसान क़र्ज़ की बोझ से निजात पाने के लिए आत्महत्या करने को मजबूर हैं .

    विकास : कुछ भावनाएं :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-अनन्या दास

    image

  • image

    अभिधान में तो मिल जाएंगी, लेकिन असली दुनिया में विकास कुछ और ही है। यहां अमेरिका में हमारे घर से आधे घंटे की दूरी पर कुछ ऐसे लोग रहते हैं जिन्होंने विकास को अपने जीवन का हिस्सा बनाने से इनकार कर दिया है। उन्हे 'आमिश' कहते हैं। दूसरे विश्व युद्ध के समय यह लोग यहां आये थे। इनके विचार से विकास ही सारी दुख और परेशानियों की जड़ है। इसीलिए तो दुनिया के सबसे विकासशील देश में रहते हुए भी उन्होंने विकास का बहिष्कार कर रखा है!

    आधी आबादी :

    तस्वीर द्वारा-

    लेखक-रेणु प्रकाश  

    image

  • image

    पिछले 20 वर्षों से मुख्य रूप से कविता लेखन एवं जनवादी महिला संगठन से संलग्न विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता का प्रकाशन। कुछ कविताएं अंग्रोजी में अनुवादित। लेखन एवं सामाजिक कार्य। अत्याधुनिक परिवेश में जब हम महिला मुद्दों पर बात करना चाहें तो एक पर एक कई आयाम खुलते चले जाते हैं।