बाल कुपोषण से जीतने की जंग

02.07.2018

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-रेणु प्रकाश

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समाज कल्याण विभाग की मानें तो राज्य में कुपोषित बच्चों की संख्या मात्र 22 हजार है। जबकि राज्य पोषण मिशन का कहना है कि झारखंड में चार लाख बच्चे कुपोषित हैं। दरअसल, समाज कल्याण विभाग उन्हीं बच्चों को कुपोषित मान रहा है जो रेड जोन में पहुंच चुके हैं और उनका उपचार सरकारी केन्द्रों में चल रहा है। दूसरी ओर, राज्य पोषण मिशन ने 2016 में बच्चों का सर्वे किया था, जिसमें चार लाख बच्चे कुपोषण की श्रेणी में चिह्नित किए गए थे। राज्य के तीन जिलों के नौ प्रखंड कुपोषण से अधिक प्रभावित पाये गये हैं। पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर, खूंटपानी, मनोहरपुर, नोवामुंडी, जगरनाथपुर और तांतनगर, गुमला के सदर तथा बोकारो के चंदनक्यारी और चास कुपोषण प्रभावित प्रखंड है। पश्चिमी सिंहभूम में पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चों की संख्या 66.9 प्रतिशत है। आदिवासी बच्चे अधिक कुपोषित गुमला सदर को छोड़कर बाकी आठ प्रखंड ग्रामीण क्षेत्रों में आते हैं। जिसका अधिकांश भू-भाग वनों से अच्छादित है। वन क्षेत्रों में अधिकांश आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं, जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं। नतीजन, ये अपने बच्चों का सही भरण पोषण नहीं कर पाते हैं।


कुपोषण का मापदंड कुपोषण के आकलन का एक मापदंड पांच वर्ष के बच्चों की आयु के अनुसार उसका वजन भी है। इसके तहत आयु के अनुसार वजन, आयु के अनुसार ऊंचाई और ऊंचाई के अनुसार कम वजन है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (एनएफएचएस-4) 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में पांच वर्ष तक के 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित थे। राज्य पोषण मिशन के बेसलाइन सर्वे से पता चला है कि इनमें से करीब चार लाख बच्चे अतिकुपोषित थे। देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद की रिपोर्ट से भी झारखंड में बच्चों व महिलाअों की स्वास्थ्य संबंधी दयनीय स्थिति की पुष्टि हो चुकी है।

झारखंड में कुपोषित बच्चों की स्थिति (% में)

जिला कुपोषित बच्चे

बोकारो 50.8%

कोडरमा 42.2%

चतरा 51.3%

लातेहार 44.2%

देवघर 46.0%

लोहरदगा 48.1%

धनबाद 42.6%

पाकुड़ 46.9%

दुमका 53.5%

पलामू 43.9%

गढ़वा 50.7%

प. सिंहभूम 66.9%

गिरिडीह 40.6%

पूर्वी सिंहभूम 49.8%

गोड्डा 46.0%