‘द मैक्स फाउंडेशन’ : रक्त कैंसर मरीजों के लिए संजीवनी

9.10.2018

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लेखक-मो. असगर खान

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 द मैक्स फाउंडेशन झारखंड में ब्लड कैंसर के मरीजों को जीने की उम्मीद दे रहा है. इन मरीजों के बीच इस संस्था की पहचान संजीवनी की तरह है. दरअसल मैक्स फाउंडेशन ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों को मुफ्त में दवा उपलब्ध कराता है, जो काफी महंगी होती है. फिलहाल पिछले पंद्रह सालों से मैक्स फाउंडेशन झारखंड में सैकड़ों असहाय और आर्थिक रुप से असक्षम मरीजों के इलाज का पूरा खर्च उठा रहा है. बताया जाता है कि इस बीमारी का इलाज 20वीं सदी में संभव हो पाया. ब्लड कैंसर यानी एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमिया. चूंकि इसकी दवा काफी महंगी होती है और जब तक जीवित है तब तक मेडिसीन लेनी पड़ती है.

इलाज पर महीने का खर्च लाख रुपये

झारखंड के विभिन्न जिलों में ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीज नाम और पता सार्वजानिक नहीं किए जाने की शर्त पर कहते हैं, “मैक्स फाउंडेशन अगर नहीं होता तो हमलोगों का इलाज संभव नहीं था. क्योंकि हर दिन इसके लिए दवा लेनी पड़ती है और एक दिन की दवा का खर्च 4000 रुपये यानी महीने में एक लाख 20 हजार होता. हमलोगों के लिए असंभव है.”

एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में हर साल 30 हजार नये कैंसर के मरीज पाये जा रहे हैं. वहीं मेडिकल रिपोर्टर और ब्लड कैंसर से पीड़ित रांची के पुष्पगीत कहते हैं कि हर साल रिम्स अस्पताल में पांच हजार मौतें कैंसर से होती हैं. 

16,000 कैंसर पीड़ितों को लाभ

मैक्स फाउंडेशन के इस नेक काम की शुरुआत के पीछे ब्लड कैंसर से पीड़ित एक बच्चे की बेबसी और उसकी मौत है. यह संस्था आज दुनिया के कई देशों में ब्लड कैंसर के मरीजों का मुफ्त इलाज करवा रही है. 1997 में अर्जेटीना का 13 साल का कामैक्स रिवारोला क्रोनिक एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमियाजैसे ब्लड कैंसर की बीमारी जूझ रहा था.  इलाज का अभाव और आर्थिक तंगी की बेबसी के आगे तीन वर्ष के बाद मैक्स ने दुनिया छोड़ दी. तभी परिवार के लोगों ने सकंल्प लिया कि अब अपने जानते हुए और किसी बच्चे को इसके कारण नहीं मरने देंगे. इसी तरह परिवार के लोगों ने उसी वर्ष मैक्स के नाम पर ‘द मैक्स फाउंडेशन’ की बुनियाद रखी. संस्था ने शुरु में 50 लोगों के साथ काम शुरू किया. आज दुनिया के अधिकतर देशों में संस्था काम कर रही है, हजारों लोग जुड़े हुए हैं. संस्था का काम वैसे ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों को ढ़ूढ़ना है जो इलाज कराने में असक्षम है. उन तक पहुंचना और उनकी जिंदगी को संजीवनी देना है. वर्तमान में मैक्स फाउंडेशन भारत के विभिन्न राज्यों से 16 हजार ब्लड कैंसर के मरीजों को मुफ्त में दवा उपलब्ध करा रही है. वहीं झारखंड में ऐसे 500 मरीजों को मुफ्त में दवा दी जा रही है.

अभियान चलाकर लाएं जागरूकता

मैक्स फाउंडेशन नॉन प्रॉफिटेबल संस्था है, जिसका हेडक्वाटर मुंबई में है .भारत में संस्था की हेड वीजी वेंकटेश कहती हैं कि मैक्स फाउंडेशन दुनिया भर के अलग-अलग देशों में ब्लड कैंसर को लेकर जागरुकता अभियान चलाता है. हिंदुस्तान में पांच साल पहले चाय फॉर कैंसर नाम से विभिन्न शहरों में चाय स्टॉल लगाना शुरु किया. इन जगहों पर कैंसर के बारे में चर्चा भी की जात है और लोगों के बीच इसे लेकर जागरुकता फैलाई जाती है..इसका लाभ यह होता है कि इसी माध्यम से लोगों से मदद के तौर पर राशि भी इकट्ठा हो जाती है. हर साल 30 स्टॉल लगाये जाते हैं.

वीजी वेंकटेश ने आगे बताया कि हाल में रांची के न्यूक्लियस मॉल में इस तरह  कार्यक्रम किया गया है. रांची में अब तक तीन बार इस तरह के कार्यक्रम हो चुके हैं. इस तरह के कार्यक्रम का उदेश्य लोगों में ब्लड कैंसर के प्रति जागरूकता लाना है.

झारखंड में 2003 से सक्रिय

मैक्स फाउंडेशन झारखंड में पंद्रह सालों से काम कर रहा है. इसके संपर्क में सबसे पहले रांची के ऋषि शाहदेव आए. वो बताते हैं कि उन्हें 2003 में ब्लड कैंसर डिटेक्ट हुआ. इलाज के लिए मुंबई गए. लेकिन इसकी दवा काफी महंगी थी और सारी जिंदगी इलाज करा पाना संभव नहीं था. इसलिए ऋषि जिंदगी से हार मानने लगे. तभी वहां के एक डॉक्टर ने उन्हें मैक्स फाउंडेशन से संपर्क करने को कहा. वो बताते हैं कि आज मैक्स फाउंडेशन उनके इलाज का पूरा खर्च उठा रहा है. झारखंड में इसके बाद से ही संस्था ब्लड कैंसर के मरीजों के बीच सक्रिय है. जिसके सूत्रधार झारखंड में ऋषि ही हैं.