अनचाहे नवजातों को मिला पालना

2018-11-09

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-रूपेश साहु

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झारखंड सरकार ने दूसरे राज्यों की तर्ज पर उन नवजातों को बचाने का संकल्प लिया है जिन्हें अनचाही संतान मानकर उनके मां-बाप यहां-वहां छोड़कर (फेंककर) भाग जाते हैं। जिस योजना के तहत सरकार ने ऐसे बच्चों को बचाने का संकल्प लिया है उसका नाम है- ‘पालना’ योजना. लावारिस या फिर अनवांटेड (अनचाहे) बच्चों को कोई भी इस पालना में रख सकता है. वैसी मां जो बच्चे को जन्म दे देती हैं, लेकिन उसे रखना नहीं चाहती है, वे भी इस पालना में अपना बच्चा रख सकती हैं. पा लो ना संस्था के मुताबिक झारखंड में बीते तीन सालों में (2015-17) लगभग 130 लावारिस बच्चों को सार्वजानिक स्थलों से बरामद किया गया है. संस्था की संयोजक आर्य मोनिका का कहना है कि 60 से अधिक बच्चे या तो मृत मिले या फिर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. दरअसल, ऐसे बच्चे क्रिटिकल कंडीशन में मिलते हैं.
ऐसे शिशु के स्वास्थ्य की जांच कराकर बाल कल्याण इकाई के द्वारा बच्चे की देखभाल के लिए उसे अडॉप्शन सेंटर में रखा जाएगा. सरकार का मानना है कि समाज में ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं जिनमें नवजात बच्चे या अनचाहे बच्चे को लोग जन्म के बाद मरने के लिए जहां-तहां फेंक देते हैं. इस पालना योजना से ऐसे बच्चों को नया जीवन प्रदान करने में मदद मिलेगी.
इस बाबत महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिला के उपायुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि अपने-अपने क्षेत्रों में पालना लगाने की प्रक्रिया शुरू करें. जिला कल्याण पदाधिकारी कंचन सिंह ने बताया कि समाज में इस तरह से मरने वाले बच्चे को बचाने के उदेश्य से सरकार पालना लगा रही है. लोगों को भी चाहिए कि सरकार की इस पहल में सहयोग करे. उन्होंने कहा कि कई फेस में पालना लगाया जाएगा. पहले चरण का काम शुरू हो गया है और कई जगहों पर लगाए भी जा चुके हैं.
क्या होगी प्रक्रिया
इस तरह के बच्चे को सुरक्षा प्रदान करने की एक प्रक्रिया होगी. डीसीपीओ सेवक राम लोहरा ने बताया की जहां-जहां पालना लगाये जायेंगे वहां जिला प्रशासन का नंबर दिया जाएगा. जैसे ही हमें सूचना मिलेगी, हम बच्चे की लीगल प्रक्रिया शुरू कर देंगे. लोकल न्यूजपेपर में हम बच्चे की पहचान करने की खबर निकलवाएंगे और अगर कोई भी 60 दिन तक उसकी पहचान करने नहीं आएगा तो हम उसे अडॉप्शन के लिए आगे बढ़ाएंगे. 60वें दिन के बाद अगर कोई आता है तो वह मान्य नहीं होगा. इस प्रक्रिया में लोगों की प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखा जाएगा. इसके लिए लोगों में जागरूकता भी फैलाई जाएगी. गौरतलब है कि बिहार, तमिलनाडु समेत कई राज्य अलग-अलग नाम से अनचाहे या लवारिस बच्चों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं.
यहां लगेगा पालना
हालांकि इस योजना के लिए सरकारी मद से कोई भी राशि खर्च नहीं की जाएगी, लेकिन इसके संचालन से लेकर हर स्तर की देखभाल विभाग ही करेगा. पालना खरीदने की प्रक्रिया में राशि कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी मद और आम जनता से जुटाई जायेगी. पालना लगाने के लिए जिला प्रशासन ने जगहों को भी चिन्हित किया है. इसमें मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सदर अस्पताल, सभी ब्लॉक के पीएचएसी अस्पताल, मोसाफिर खाना आदि जगहों पर पालना लगाया जाएगा. राजधानी रांची में पहले चरण में नौ पालना लगाया जा चुका है, जबकि दूसरे चरण में पालना लगाए जाने का काम जारी है. रांची में लगाये पालना में रिम्स, सदर अस्पताल, कांके पीएचसी, ओरमांझी पीएचसी, नामकुम पीएचसी, चान्हो पीएचसी, मांडर पीएचसी, अनगड़ा पीएचसी शामिल है.