विटामिन ए2 बहुलता वाला दूध

2018-11-09

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-उपेन्द्रनाथ पांडेय

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए गिर गाय के ए-टू विटामिन की बहुलता वाले दूध उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रेरणा लेकर रांची के लालगुटुवा निवासी कुशहवज नाथ शाहदेव ने भी राजधानी वासियों को गिर-गाय का दूध उपलब्ध कराने का प्रयास प्रारंभ किया है। रांची के लालगुटुवा के रहने वाले कुशहवज नाथ शाहदेव ने बताया कि उन्नत विदेशी और हाइब्रिड नस्ल की गाय दूध जरूर अधिक मात्रा में देती है, लेकिन पौष्टिकता के दृष्टिकोण से देसी नस्ल की गिर गाय का दूध सर्वोत्तम है। बाजार में यह दूध प्रति लीटर 120 रुपये लीटर बिकता है। जल्द ही उनके डेयरी में पांच हजार से अधिक गायें उपलब्ध होंगी। देशी गिर गाय की ख्याति अब राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगी है। दूर-दूर से गो-पालक और किसान डेयरी फार्म खोलने हेतु जानकारी प्राप्त करने के लिए गुटुवा के आर. डेयरी फॉर्म में पहुंचने लगे हैं।

गो-मूत्र में स्वर्ण अंश की मात्रा

कुशहवज नाथ शाहदेव ने बताया कि गिर गाय के मूत्र में स्वर्ण अंश भी मौजूद होता है और विशेषज्ञों ने अध्ययन के बाद इसकी पुष्टि की है। स्वर्ण अंश निकालने के लिए एक संयंत्र की स्थापना की जाएगी। डेयरी फार्म में अभी उपलब्ध गिर गाय से दूध की मांग की पूर्ति नहीं हो पा रही है। इसलिए उन्होंने डेयरी फार्म का विस्तार कर पांच हजार गो-पालन की योजना बनायी है। उन्होंने स्वीकार किया कि देसी नस्ल की गिर गाय की कीमत थोड़ी अधिक है, जितने में एक गिर नस्ल की गाय खरीदी जाती है, उतनी ही राशि में हाईब्रिड नस्ल की 10 गायें खरीदी जा सकती हैं। 

दूध खरीदने वालों की लंबी कतार

आर-स्टार डेयरी फार्म में वर्षों से गायों की सेवा कर रहे कर्मचारियों का कहना है गिर गाय की कई ऐसी विशेषताएं हैं, जो अन्य हाईब्रिड और विदेशी नस्ल की गायों में नहीं होती हैं। इसी कारण इस गाय का दूध महंगा बिकता है। गिर गाय के दूध की महत्ता अब बुद्धिजीवी वर्ग के लोग अच्छी तरह से समझने लगे हैं। इसलिए सुबह-सुबह ही डेयरी में शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी और बड़े अधिकारी तथा बुद्धिजीवी वर्ग के लोग पहुंचते हैं और विटामिन ए-टू बहुलता वाले दूध को खरीदने के लिए लंबी लाइन लग जाती है। इसलिए अभी सीमित ग्राहकों को ही यह दूध उपलब्ध कराया जा रहा है। 

बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमी करता है गिर गाय का दूध

गिर भारत के एक प्रसिद्ध दुग्ध पशु नस्ल है। यह भारत की सबसे पुरानी देशी गाय है और इसके दूध से हमें शुद्ध देशी घी मिलता है। यह गुजरात राज्य के गिर वन क्षेत्र और महाराष्ट्र तथा राजस्थान के आसपास के जिलों में पायी जाती है। यह गाय अच्छी दुग्ध उत्पादकता के लिए जानी जाती है। इस गाय के दूध में सोने के तत्व पाए जाते हैं जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। गिर गाय के दूध-घी बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। इसमें ओमेगा 3 के साथ विटामिन ए2, ई और डी शामिल होते हैं। गाय का दूध टूटी हुई हड्डी का इलाज करने में भी सक्षम है। यही नहीं, इसका दूध किडनी के लिए भी लाभदायक होता है।

इस गाय के शरीर का रंग सफेद, गहरे लाल या चॉकलेट भूरे रंग के धब्बे के साथ या कभी कभी चमकदार लाल रंग में पाया जाता है। कान लम्बे होते हैं और लटकते रहते हैं। इसकी सबसे अनूठी विशेषता उनकी उत्तल माथे हैं जो इसको तेज धूप से बचाते हैं। यह गाय अपनी अच्छी रोग प्रतिरोध क्षमता के लिए भी जानी जाती है। यह नियमित रूप से बछड़ा देती है। पहली बार 3 साल की उम्र में बछड़ा देती है। गिर गायों में थन अच्छी तरह विकसित होते हैं। यह गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती है। इसके दूध में 4.5 प्रतिशत वसा होती है। गिर का एक बियान में औसत दुग्ध उत्पादन 1590 किलोग्राम है। ये पशु विभिन्न जलवायु के लिए अनुकूलित होते हैं और गर्म स्थानों पर भी आसानी से रह सकते हैं।