'ऑनलाइन' पर आगे बढ़ता झारखंड का किसान

2018-11-10

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-ए. खान

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झारखंड के किसान ऑनलाइन व्यापार में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. राज्य के किसानों ने लगभग 6610 क्विंटल अनाज ऑनलाइन के माध्यम से बेचे हैं और इससे करीब छह करोड़ का व्यापार किया जा चुका है. इनके लिए केंद्र सरकार के द्वारा चलाये जा रहे ई-नाम से ऐप ( इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय बाजार) सार्थक साबित हो रहे हैं. अब इन्हें खरीदार की राह नहीं देखनी पड़ती है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य भर के खरीदार इनकी उपज की बोली लगाते हैं। राज्य में इस एेप में अभी तक लगभग 20539 किसान रजिस्टर्ड हो चुके हैं। जबकि 1529 व्यापारी ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके जरिए अनाजों की ऑनलाइन बोली लगती है और किसानों का डिजिटल भुगतान होता है. इस दौर में अब किसान भी डिजिटल इंडिया उपयोग कर उससे लाभ उठा रहे हैं. किसान ऑनलाइन मंडी में 90 प्रोडक्ट बेच सकते हैं. सूबे के किसान धान, चावल, गेहूं समेत दलहन, तिलहन, सब्जी आदि.वर्तमान में राज्य की 19 बाजार समितियों में इसकी सुविधा शुरू की गयी है. इतना ही नहीं, यहां प्रोडक्ट की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशालाएं भी बनायी गयी हैं. फिलहाल 10 बाजार समिति में प्रयोगशाला की सुविधा शुरू की गयी है. 
क्या है प्रक्रिया
किसानों के बीच फसल की सही दर नहीं मिलना एक बड़ी समस्या बतायी जाती है, लेकिन ऑनलाइन व्यापार ऐसा नहीं है.ऑनलाइन व्यापार में प्रतिवर्ष कारोबार में तुलनात्मक वृद्धि हो रही है. 2016 में केंद्र सरकार ने इसकी शुरुआत की. पिछले तीन साल के आकड़ों को देखें तो 2016-17 में ऑनलाइन बिडिंग के माध्यम से 62 लाख 69 हजार रुपये की कीमत से 2640 क्विंटल अनाज बेचे गये। 2017-18 में  तीन करोड़ 32 लाख के 25595 क्विंटल और 2018-19 में एक करोड़ 98 लाख के 1565 क्विंटल अनाज का व्यापार हुआ। ई-नाम एेप के माध्यम से राज्य के किसान रजिस्टर्ड मंडी में अपना अनाज पहुंचाते हैं। यहां इसकी ऑनलाइन बोली लगाई जाती है। इसमें राज्य भर के व्यवसायी शामिल होते हैं, जिन्हें झारखंड राज्य कृषि विपणन परिषद की ओर से लाइसेंस निर्गत किया गया है. जिनकी बोली सबसे अधिक होती है, उन्हें यह अनाज दिया जाता है। सरकार की यह पहल से किसानों काफी लाभ पहुंच रहा है. ई-नाम ऐप की सुविधा राज्य के कई जिलो में है. पंडरा (रांची), धनबाद, गुमला, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर), पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा), डालटनगंज,  सिमडेगा, रामगढ़, हजारीबाग, साहिबगंज, बोकारो, गढ़वा, चाकुलिया, गिरिडीह, पाकुड़, कोडरमा, देवघर और दुमका.
67 लाख डिजिटल पेमेंट
किसानों को उनके ऑनलाइन कारोबार के लिए भुगतान में 24 घंटे प्रक्रिया होती है. पैसा डायरेक्ट किसानों के खाते में ट्रांसफर होता है. राज्य में डिजिटल पेमेंट की सुविधा मार्च से शुरू हुई है और अभी तक 67 लाख का डिजिटल पेमेंट हुआ है। इसके ट्रेडर के खाते से पैसा पहले भारत सरकार के खाते में जाता है।  इसके बाद किसान के खाते में ट्रांसफर होता है। इस प्रक्रिया में 24 घंटे का समय लगता है.  ई-नाम के माध्यम से उत्पाद बेचने पर पैसे के लिए किसानों को किसी बिचौलिये की जरूरत नहीं पड़ती. डिजिटल पेमेंट के माध्यम से उनका भुगतान होता है. राज्य में डिजटल पेमेंट की सुविधा मार्च से शुरू हुई है और अभी तक 67 लाख का डिजिटल पेमेंट हुआ है. इसके ट्रेडर के खाते से पैसा पहले भारत सरकार के खाते में जाता है.  इसके बाद किसान के खाते में ट्रांसफर होता है. इस प्रक्रिया में 24 घंटे का समय लगता है.