पक्षियों के प्रेम ने पन्ना लाल को बनाया 'बर्ड मैन'

2018-11-10

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-ए. खान

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पक्षियों के साथ रहना झारखंड के रामगढ़ जिले के पन्ना लाल की दिनचर्या है. पक्षियों के साथ रह कर पन्ना लाल ने जो सीखा वह अद्भुत तो है ही, अब तो यही उनकी पहचान बनती गयी है. रामगढ़ सरैया गांव के पन्ना लाल लगभग 30 परिंदों की आवाजें हूबहू निकाल लेते हैं. वे पक्षियों की आवाजों में बाज़ाब्ता बातें करते हैं. इसी अद्भुत कला के कारण उन्हें ग्रमीण, वन विभाग के अधिकारी और स्कूल-कॉलेज के लोग 'बर्ड मैन' पन्ना लाल पुकारा करते हैं. पिछले कुछ माह से धीरे-धीरे पन्ना लाल की पहचान अब झारखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी बन गयी है. हाल ही में वे दिल्ली के एक कॉलेज में कई परिंदों की आवाजों का डेमोन्स्ट्रेशन देकर आये हैं जहां छात्र उनकी काबिलियत के कायल हो गये.
110 परिंदों की आवाजें बिना देखें ही पहचान लेते 
पन्ना लाल कौवा, मोर-मोरनी, मुर्गा-मुर्गी, तीतर, नीलकंठ पक्षी, श्वेतकंठ कौड़िल्ला, सफेद ब्रेस्टेड वॉटरन, हंस, चितरोखा, कबूतर, महोख, चकवा, कोयल, नाइटजर आदि की आवाजें निकालते ही नहीं, बल्कि इनसे इनकी ही भाषा में भली-भांति बात करते हैं.
पन्ना लाल अपने इस अनोखे अनुभव के बारे में बताते हैं कि वे इनमें से कई पक्षियों की अलग-अलग तरह की आवाज निकाल लिया करते हैं. मोर, मुर्गा, जंगली मुर्गा, तीतर वे पक्षी हैं जो कई तरह की आवाजें निकाला करते हैं. इन पक्षियों को जब अन्य किसी जीव-जन्तुओं से जान का खतरा होता है या इनके ब्रीडिंग का समय आता है तब ये 'कोड वर्ड' में बात करते हैं.
पन्ना लाल कहते हैं कि कई वर्षों तक उन्होंने पक्षियों के रहन-सहन, खान-पान जैसी बारीक चीजों पर शोध किया है. उन्हें ये भी पता है कि कौन पक्षी कब और किस मौसम में अंडा देता है. 
पन्ना लाला का पेशा ईंट बेचना है और पैशन पक्षियों का है. वे विशेषकर रामगढ़ के सिकिदिरी, इचातू, बंगाई, कुजू के जंगलों में ही पक्षियों के बीच रहते और उनसे संवाद किया करते हैं. इन जंगलों में अपनी आवाजों से पक्षियों को पास बुला लेते हैं. जब वे ऐसा करते हैं तब आसमान में पक्षियों का जमघट लग जाता हैं. पन्ना लाल कहते हैं, “मैं झारखंड पाये जाने वाले लगभग 110 पक्षियों की आवाज बिना देखे ही सुनकर पहचान सकता हूं.”
जो सुनता है, भौंचक रह जाता
पन्ना लाल के द्वारा निकाले जाने वाली परिंदे की आवाज को जो सुनता है भौचक रह जाता है. पन्ना को झारखंड के सभी जिलों डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) भी जानते हैं. रामगढ़ के जिले डीएफओ विजय शंकर दुबे पन्ना की आवाज के बारे में कहते हैं, “हूबहू पक्षियों की आवाज निकाल लेना अविश्वसनीय है. पन्ना जब जंगल में जिस भी पक्षी की आवाज निकालते हैं तो वह पक्षी पास चला आता है, या फिर दूर से ही अपनी भाषा में बातें करने लगता है.”
लोहरदगा के डीएफओ का मानना है कि पन्ना के इस हुनर में उसकी कड़ी मेहनत शामिल है. जंगल, जानवरों और पक्षियों के प्रति उनका ये लगाव सराहनीय है. इसे समझे और इसमें समय लगाये बिना आप पन्ना नहीं बन सकते हैं. 
वहीं, पन्ना के इस काबिलियत से रूबरू होकर झारखंड के डीजीपी की पत्नी पूनम पांडे अचंभित रह गयीं. पन्ना बताते हैं, “मेरे बारे में छपी एक खबर को देख पूनम पांडे ने मुझे अपने घर आने का आमंत्रण दिया. जब मैंने उनके समक्ष कई पक्षियों की आवाजें निकाली तो वे हतप्रभ हो गयीं. उन्होंने मुझे सम्मानित किया और अपने एनजीओ से जोड़ लिया.”
बीस वर्षों की मेहनत का नतीजा
घर में दो भइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे पन्ना लाल हैं. वे पांच साल की उम्र से पक्षियों के बीच रहते आ रहे हैं. घर में चाचा निलक महतो ने कुछ पक्षी पाल  रखे थे, जिसे खाना खिलाना पन्ना लाल के जिम्मे था. इसी समय से पक्षियों के प्रति उनका लगाव जागृत  हुआ. पन्ना लाल कहते हैं, “32 साल की उम्र में मेरा दो दशक से भी अधिक समय इन्हीं पक्षियों के बीच गुजरा है. कई साल इनके साथ समय बिताया है. पत्नी और परिवार वाले हमेशा मुझे मना करते थे कि काम-धाम छोड़कर मैं ये सब न किया करूं, लेकिन पक्षियों के जुनून की जद से मैं कभी बाहर नहीं निकल पाया.”
पन्ना लाल ने पक्षियों की आवाजें निकालने का कई वर्षों तक अभ्यास किया। मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ झारखंड के विभिन्न जंगलों में घूम-घूमकर पक्षियों को 'पढ़ना' शुरू कर दिया. उन्हें जाना-पहचाना. ये पक्षी कब, कैसे बोलते इसे ध्यान से सुना. बीच-बीच में बर्ड सेंचुरी जाकर भी मदद ली. तब जाकर 20 वर्षो की कड़ी मेहनत के बाद पिछले दो साल से पन्ना लाल लगभग 30 पक्षियों की आवाजें निकाल रहे हैं. पन्ना भविष्य में इसे ही अपना प्रोफेशन बनाना चाहते हैं. 
लक्ष्य पक्षियों का सरंक्षण
'जल, जंगल जमीन' के आंदोलन से इतर पन्ना पक्षियों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उनका मकसद है कि झारखंड में विलुप्त हो रहे पक्षियों को बचाया जाये. इसी दिशा में उन्होंने कदम भी बढ़ा दिया है. हाल ही में दिल्ली के ओखला बर्ड सेंचुरी, राजस्थान के केवादेव नेशनल पार्क में नये पक्षियों पर शोध करके झारखंड लौटे हैं. 
पन्ना लाल का कहना है कि कुछ पक्षियों की आवाजों पर वे काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने पक्षियों के संरक्षण के लिए नयी तकनीक भी सीखी है. आगे वे नये-नये पक्षियों पर शोध करना चाहते हैं.
कुछ समय पहले पन्ना को यूपी के नोयडा स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फोटोग्राफी कॉलेज ने सम्मानित किया है. इधर पन्ना लाल को स्कूल कॉलेज से भी आमंत्रण आ रहे हैं. 
पन्ना लाल ने कहा, रांची के संत जेवियर्स स्कूल और लोहरदगा के डीएवी स्कूल में उन्होंने छात्रों को दो-दो दिन पक्षियों के बारे में ट्रेनिंग दी है. जबकि सरला बिरला स्कूल से आमंत्रण आया कि वे यहां भी आकर बच्चों को पक्षियों के बारे में बताएं.
इस बारे में रांची कॉलेज के जियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी कहते हैं कि पन्ना लाल एक खोज है, जिससे पर्यावरण और पक्षियों दोनों को ही बचाया जा सकता है. इस तरह से पक्षियों की आवाजें निकालने वाले लोग बहुत कम होते हैं. पन्ना लाल की मदद से हमलोग इको सिस्टम बैलेंस में रख सकते हैं.