कबाड़ के जुगाड़ से व्यापार

2018-11-10

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-साक्षी अग्रवाल

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आज के युवा पढ़ाई पूरी कर नौकरी करने के बजाय स्टार्टअप की ओर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। अपनी क्रिएटिविटी और  इनोवेटिव आइडियाज के साथ कुछ नया शुरू कर रहे हैं। हर रोज़ हमलोग नये स्टार्टअप आइडियाज के बारे में सुनते हैं। पर क्या अापने सोचा है कि कबाड़ी का भी काम स्टार्टअप हो सकता है। यह नयी सोच है? नहीं ना! पर रांची के शुभम जायसवाल को कबाड़ी के काम में भरपूर संभावनाएं दिखीं और तमाम अड़चनों के बाद उन्होंने अपनी कंपनी भी  खड़ी कर ली।
'स्वच्छ भारत' से मिली प्रेरणा*-
रांची के कोकर निवासी शुभम ने दिल्ली के एक निजी संस्थान से एमबीए की पढ़ाई की, और पढ़ाई पूरी कर लगभग 4 साल नौकरी भी की। नौकरी करने के दौरान उन्होंने अपने शहर में 'कुछ अपना' करने का निश्चय किया। शुभम बताते हैं कि उस वक़्त 'स्वच्छ भारत' जोर-शोर से चल रहा था। और इसी से प्रेरित होकर उन्होंने 1 अगस्त, 2017 को 'thekabadi.com' की शुरुआत की।
22 लोगों को दिया रोजगार
शुभम कहते हैं कि भले ही बीते दिनों के साथ रांची एजुकेशन हब के तौर पर उभरा है, पर आज भी यहां रोजगार के अवसर ना के बराबर हैं। पढ़े-लिखे युवा घर पर बेरोजगार बैठे रहते हैं। शुभम इन युवाओं को अपने स्टार्टअप के जरिये रोजगार प्रदान करना चाहते थे और आज वो 22 लोगों को रोजगार देने में सफल हुए हैं। शुभम के साथ काम कर रहे नौजवान पार्ट टाइम की तरह नौकरी कर रहे और साथ में पढ़ाई भी कर रहे।
बस एक कॉल की दूरी
घर में पड़े कबाड़, स्क्रैप बेचना चाहते हैं, तो बस एक कॉल करें और टीम कबाड़ीवाले आपके दरवाज़े पर हाज़िर हो जाएंगे। कॉल करने लिए 8084505020 पर डायल करना होता है। 'the kabadi.com' पर लॉगऑन करके भी मैसेज किया जा सकता है।  टीम इलेक्ट्रॉनिक वेटिंग मशीन के साथ पहुंचती है, इससे वजन में घपला का भी डर नहीं। इसके साथ ही उचित उत्पाद का सही दाम भी मिल जाता है।
कंपनी को कराया रजिस्टर्ड
शुभम ने बताया कि वह बड़े पैमाने पर काम करना चाहते हैं, इसके लिए पहले उन्होंने 'जंक सॉलूशन प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से कंपनी को रजिस्टर्ड करवाया।
कबाड़ को री-साइकल के लिए भेजते हैं बाहर
शुभम बताते हैं कि वह जो कबाड़ लेते हैं, उसे बाहर के राज्यों में री-साइकल के लिए भेजते हैं। प्लास्टिक के उत्पादों को एनसीआर भेजते हैं और पेपर को रायपुर।
रांची के लोगों में बढ़ रही जागरूकता
शुभम ने बताया कि शुरुआती दौर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। लोग ज़्यादातर कबाड़ीवाले पर भी निर्भर रहते थे, पर अब लोगों में जागरूकता आयी है और हर रोज लगभग 15 कॉल आते हैं। वीकेंड्स पर ज़्यादा कॉल आते हैं। लोग कॉल करने के साथ वेबसाइट पर लॉगऑन करके भी बुलाते हैं। अभी टीम के पास सात गाड़ियां हैं और लगभग 5000 रेगुलर ग्राहक।
सॉलिड वेस्ट से लेकर ई-वेस्ट तक की खरीदारी
घर से निकले पेपर वेस्ट, कार्टन, टीना, प्लास्टिक के सामान से लेकर ई-वेस्ट तक की यहां खरीदारी होती है।  शुभम ने बताया कि उनके पास ई-वेस्ट तक बेचने के लिए कॉल्स आते हैं। पुराने कंप्यूटर, फ्रिज, टेलीविज़न, मोबाइल बेचने के लिए हर रोज़ कॉल्स आते हैं। इस ई-वेस्ट को वह 'फ़िया फाउंडेशन' नाम की कंपनी को उपलब्ध कराते हैं।

यह है रेट लिस्ट
एल्युमीनियम 65 रुपये/किलो
पीतल        150 रुपये/किलो
तांबा                 250 रुपये/किलो
प्लास्टिक         दो से सात रुपये/किलो
बोतल         50 रुपये/किलो
टीवी                 50 रुपये/पीस
कंप्यूटर         20 रुपये/पीस
मोबाइल         80-120 रुपये/ पीस
फ्रिज                 300-350 रुपये/ पीस
बैटरी                 40-60 रुपये/पीस
मदरबोर्ड         40 रुपये/पीस