संघर्ष से ही मिलती है मंजिल

2018-11-10

|

तस्वीर द्वारा-

|

लेखक-ब्रजेश राय

image

image

झारखंड की दिग्गज और सफल महिलाओं की बात हो और अगर उसमें सुजाता भगत का नाम न आये तो ये लिस्ट कुछ अधूरी लगेगी। झारखंड पुलिस में कार्यरत सुजाता भकत ने अमेरिकी में सम्पन्न वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग में देश के लिए कई गोल्ड जीते। सुजाता भकत ने फुल पावर लिफ्टिंग में दो गोल्ड, एक गोल्ड पुश पुल (बेंच प्रेस एंड डेड लिफ्ट) में आैर एक सिल्वर ओपन फुल पावर लिफ्टिंग में हासिल किये।
लम्बे समय के बाद की खेलों में वापसी
सुजाता के जज्बे को सलाम करना होगा कि सात ऑपरेशन झेलने और लगभग 12 साल तक खेल से एकदम अलग रहने के बाद भी इस मुकाम को छूना का दम दिखाया। वह भी तब कि जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट की प्लानिंग कर लेते हैं, खेलों में फिर लौटना बहुत बड़ी चुनौती मानी जाती है, लेकिन उन्होने इस चुनौती को न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि पावर वीमेन बनकर दिखाया। 1999 में सुजाता का एक्सीडेंट हुआ था और वह बिस्तर पर चली गयी थीं। फिर अबडोमिनल डिजीज का शिकार भी हुईं। पेट के सात ऑपरेशन की पीड़ा को झेलने के बाद जैसे ही ट्रैक पर उतरने की तैयारी की, रयुमेटिक फीवर ने घेर लिया, लेकिन इतनी सारी पीड़ा के बावजूद सुजाता ने हार नहीं मानी। इन शारीरिक कष्टों को हराकर उन्होंने वापसी की और जीत कर भी दिखाया।
सुजाता का स्पोर्ट्स में काफी पुराना नाता है। वह तीन बार एशियन चैंपियन रहीं और इससे अधिक बार नेशनल चैंपियनशिप जीतीं। सुजाता पावर लिफ्टिंग के क्षेत्र में आना संयोगवश ही है। सुजाता ने अपनी शुरुआत एक एथलीट के रूप में की थी। करीब ढाई दशक पहले इंटरमीडिएट करते समय उन्होंने 200 मीटर में जो रिकॉर्ड बनाया था वह आजतक नहीं टूटा है। लेकिन असली पहचान तो उनकी पावर लिफ्टिंग में बननी थी और उन्होंने बनायी भी। एथलेटिक्स और पॉवर लिफ्टिंग के बाद रेसलिंग में भी सुजाता ने हाथ आजमाया, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी असल पहचान पॉवर लिफ्टिंग ही दिला सकता है और हुआ भी वही। 
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली कई सफलताएं 
सुजाता जिस जिम में जाती थीं, वहां के लोगों के जोर के बाद उन्होंने ईस्टर्न इंडिया लेवल पर आयोजित पॉवर लिफ्टिंग की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उसमें उन्हें सिल्वर मैडल मिला, फिर क्या था, हो गयी सुजाता की नयी शुरुआत और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2011 में तमिलनाडु में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय स्पर्द्धा में उन्हें गोल्ड मिला तो वह राष्ट्रीय खिलाडी के रूप में स्थापित हो गयीं। 2011 में जापान में आयोजित एशियन कम्पटीशन में भी गोल्ड मैडल जीता। राजस्थान के उदयपुर में आयोजित एशियन लेवल कम्पटीशन में गोल्ड मैडल लिया। 2013 में एक्विपड और अन एक्विपड दोनों केटेगरी में गोल्ड मिला। इसी तरह 2014 में आयोजित होने वाले फेडरेशन कप में गोल्ड जीतने वाली झारखंड की पहली पॉवर लिफ्टर बनीं।
नयी पौध भी कर रहीं तैयार
ये सफलता ऐसे ही नहीं मिलती। वह हर दिन 6 से 8 घंटे अपने जिम में पसीना बहती हैं। इनकी कई छात्राएं भी हैं जो इनसे पावर लिफ्टिंग का गुर सीखती हैं | इस मुकाम पहुंचने के बाद सुजाता ने नयी पौध की तैयारी शुरू कर दी है ताकि वे आगे चल कर झारखंड ही नहीं देश का नाम रौशन कर सकें। उनकी एक शिष्या है आस्था। सुजाता इसमें अपनी परछाईं देखती हैं तभी तो उन्होंने आस्था में पावर लिफ्टिंग में सफलता की कहानी गढ़नी शुरू कर दी है। हर रोज जिम में पसीना बहाने वाली सुजाता ने आम महिलाओं को यह भी बताने की कोशिश करती हैं कि किस तरह से वे अपने आप को फिट रख सकती हैं | 
गृहिणी के रूप में भी सफल
सुजाता को जिम ही नहीं, घर में पसीना बहाना भी पसंद है। पावर लिफ्टिंग में दर्जनों गोल्ड, सिल्वर मेडल जीतने वाली सुजाता एक कुशल गृहिणी भी हैं। सुजाता के दो बच्चे भी हैं जो अब बड़े होकर रांची से बाहर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।