नेचुरल नेल पॉलिश से चमकेंगे नाखून

2018-12-10

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-दयानन्द राय

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महिलाओं के लिए खुशखबरी है। नामकुम स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल रेजिंस एंड गम्स के वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत के बाद नेचुरल नेल पॉलिश और आलता तैयार किया है। नेल पॉलिश से जहां नाखूनों को बेमिसाल चमक मिलेगी, वहीं आलता से पैरों की त्वचा मोस्चराइज होगी। आलता का तो बीआईटी मेसरा में स्किन टेस्ट भी कराया गया है जिसमें वह पास हो गया है। नेचुरल नेल पॉलिश का फॉर्मुलेशन जहां संस्थान के वैज्ञानिक डॉ फहीम अंसारी ने किया है, वहीं आलता को नंदकिशोर ठोंबरे ने डेवलप किया है।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ फहीम ने बताया कि लाह से जो नेचुरल नेल पॉलिश बनायी गयी है वह नॉन टॉक्सिक है और इन्हें लगाने से नाखूनों को शानदार चमक  भी मिलती है। यह नेल पॉलिश अन्य नेल पॉलिश की तुलना में ज्यादा समय तक नाखूनों में जमी भी रहती है। यही नहीं, यह त्वचा के लिए भी अच्छी है, क्योंकि यह पूरी तरह नेचुरल है। इससे नाखून और त्वचा सुरक्षित रहती है। बाजार में जो नेल पॉलिश उपलब्ध हैं उनमें कई तरह के केमिकल्स होते हैं। उनका सेहत पर भी अच्छा असर नहीं पड़ता। पर यह पूरी तरह सेफ और सस्ती है। यह कई रंगों में भी बनायी जा सकती है। उन्होंने बताया कि नेल पॉलिश भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि इसका फॉर्मूलेशन महाराष्ट्र के वर्धा के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बेचा गया है और वे इसका उत्पादन कर रही हैं । कई कंपनियां भी इसका उत्पादन करने  को इच्छुक हैं।
वहीं लाह से आलता तैयार करने वाले नंदकिशोर ठोंबरे ने बताया कि लाह से बने नेचुरल आलता से पैरों की त्वचा सुंदर बनी रहती है और स्किन भी मॉस्चराइज होती है। इसमें ग्लिसरीन और हल्दी भी मिलायी गयी है जो त्वचा के लिए फायदेमंद है। इसे बनाने में एडिबल ग्रेड कलर का यूज किया गया है। वहीं संस्थान के डायरेक्टर डॉ केवल कृष्ण शर्मा ने बताया कि सिंथेटिक प्रोडक्ट स्वास्थ्य की  दृष्टि से अच्छे नहीं होते। संस्थान के वैज्ञानिकों ने जो नेल पॉलिश और आलता तैयार किया है उनमें बायोडिग्रेडेबल कलर और नेचुरल उत्पादों का इस्तेमाल किया गया है। ये हेल्थ और पर्यावरण दोनों के लिहाज से बेहतर हैं। उन्होंने बताया कि सिंथेटिक डाई से बने आलता को एक बार लगाने के बाद उसे छुड़ाना मुश्किल होता है, पर नेचुरल आलता को सोप या डिटरर्जेंट से आसानी से साफ किया जा सकता है। इसमें प्रयोग में लाया गया ग्लिसरीन जहां स्किन के लिए सेहतमंद है, वहीं हल्दी घाव भरने में मददगार है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने जो आलता डेवलप किया है वह त्वचा के प्रति सजग लोगों के लिए है। लाह एक नेचुरल प्रोडक्ट है जिसका स्किन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
गौरतलब है कि लाह अनुसंधान के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल रेजिंस एंड गम्स राष्ट्रीय स्तर का नोडल संस्थान है। इसकी स्थापना 20 सितम्बर 1924 को की गयी थी। प्रथम विश्व युद्ध के बाद लाह की पूरे विश्व में स्ट्रेटजिक इंपोर्टेंस बढ़ गयी थी। ऐसे में इस संस्थान की बुनियाद रखने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने  मिसेज डोरोथी नोरिस को बुलाया था। उन्होंने ही नामकुम के घने जंगलों में इस संस्थान की बुनियाद रखी थी। वह पेशे से बायोकेमिस्ट थीं और  1923 से 1936 तक संस्थान की डायरेक्टर रहीं। इसके दूसरे डायरेक्टर राय बहादुर एच के सेन बनाये गये थे। 
बाजारू नेल पॉलिश स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
बाजारू नेल पॉलिश खरीदने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि वे इस्तेमाल के लिए कितने सुरक्षित हैं। वैज्ञानिक शोधों से यह पता चला है कि बाजार में मिलने वाले नेल पॉलिश लगाना स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक हैं। इसमें मौजूद केमिकल त्वचा या आंखों के संपर्क में आने पर सेहत पर बुरा प्रभाव डालता हैं। दरअसल, नेल पॉलिश में Formaldehyde नाम का एक केमिकल होता है जो उत्पाद को चिपचिपा बनाने के लिए प्रयोग में किया जाता है। जब यह त्वचा के संपर्क में आता तक इस केमिकल  से खुजली की समस्या हो जाती है। नेल पॉलिश में Phthalates नामक एक ऑयली केमिकल भी होता है, जो लगाते समय इसमें क्रैक नहीं पड़ने देता, लेकिन जब यह आंख और मुंह के संपर्क में आता है तो संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे नाक और गले में इंफेक्शन तक हो सकता है।  नेल पॉलिश में मौजूद Toluene केमिकल की वजह से सिर दर्द, त्वचा संबंधी समस्याएं आदि हो सकती हैं। अगर यह केमिकल बहुत अधिक मात्रा में शरीर में पहुंच जाए तो लीवर और किडनी तक को डैमेज कर देता है।