देश के साथ झारखंड में भी बढ़ा वन क्षेत्र

2018-12-26

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-परम

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देश में वन आवरण बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (एनएपी) और हरित भारत मिशन (जीआईएम) के तहत वनीकरण कार्यक्रम किये जा रहे हैं| इसके अलावा मनरेगा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन तथा योजना प्राधिकरण (कामपा) के तहत भी वनीकरण गतिविधियां जारी हैं|एनएपी जनता की भागीदारी के माध्यम से अवक्रमित वनों तथा आसपास के क्षेत्रों के वनीकरण के लिए चलाई जा रही एक केंद्र प्रायोजित योजना है| 2000 – 02 में इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई| वर्तमान वित्त वर्ष में 28 फरवरी 2018 तक इस योजना के तहत 21.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार के लिए राज्यों को 3778.63 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गयी है| साथ ही, राष्ट्रीय हरित भारत मिशन के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों के संचालन के लिए भी नौ राज्यों को 157.19 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गयी है| अद्यतन सूचना के अनुसार देश का कुल 13,61,248.21 हेक्टेयर वन क्षेत्र अतिक्रमण के दायरे में है|
शीर्ष 10 देशों में भारत
केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री डॉ हर्षवर्धन द्वारा जारी 'भारत राज्य वन रिपोर्ट 2017' में कहा कि देश में पिछले 10 सालों के दौरान वन क्षेत्र (वह क्षेत्र जिनके ऊपर पेड़ हैं) में इजाफा हुआ है और देश वन क्षेत्र के मामले में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र के मामले में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल भारत में इन देशों के मुकाबले आबादी का दवाब कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि बाकी 9 देशों में प्रति वर्ग किमी में 150 लोग रहते हैं| भारत में प्रति वर्ग किमी में 382 लोग रहते हैं। इसके बावजूद भारत का वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का 24.4 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि आबादी और पशु धन के दबाव के बावजूद भारत में वन क्षेत्र का लगातार विस्तार हो रहा है। वार्षिक आधार पर सबसे ज्यादा वन क्षेत्र में इजाफा करने वाले देशों में भारत का स्थान आठवां है। 2015 के पिछले आकलन के बाद दो सालों में देश में 8,021 वर्ग किमी वन क्षेत्र में इजाफा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश (2141 वर्ग किमी), कर्नाटक (1101 वर्ग किमी) और केरल (1043 वर्ग किमी) इन तीन राज्यों में वन क्षेत्र में अधिकतम वृद्धि हुई है। वन क्षेत्र के हिसाब से मध्यप्रदेश देश में 77,414 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के साथ सबसे ऊपर है| उसके बाद अरुणाचल प्रदेश (66,964 वर्ग किमी) और छत्तीसगढ़ (55,547 वर्ग किमी) का स्थान है। भौगोलिक क्षेत्र और वन क्षेत्र के प्रतिशत के हिसाब से लक्षद्वीप (90.33 प्रतिशत) सबसे अधिक वनों के आवरण में है। इसके बाद मिजोरम (86.27 प्रतिशत) और अंडमान निकोबार द्वीप (81.73 प्रतिशत) का नंबर आता है।
झारखंड में 29 वर्ग किलोमीटर बढ़ा वन क्षेत्र
झारखंड का वन आवरण 29 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है, हालांकि घने जंगल और सामान्य घने जंगल में तीन से छह प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र में 29.55 प्रतिशत वन आवरण है। यह रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान देहरादून की है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 से 2017 के दौरान झारखंड का वन आवरण 314 वर्ग किमी बढ़ा है। दूसरी ओर बाहरी वन क्षेत्र में डिजिटल रिपोर्ट के अनुसार रिकॉर्ड वन क्षेत्र में 285 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज हुई। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट सर्वे 2017 (आईएसएफआर) के अनुसार 79,716 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का केवल 0.04 प्रतिशत वन क्षेत्र बढ़ा है। सर्वे में 2015 के आकलन को अपडेट किया गया है। इसके अनुसार राज्य का वनक्षेत्र 23,524 वर्ग किलोमीटर था। वर्ष 2017 में यह 23,553 वर्ग किलोमीटर हो गया। यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.55 प्रतिशत है। 2015 की प्रारंभिक आईएसएफआर रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में 23,478 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र था। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों के दौरान देश के वन क्षेत्र में 6,778 वर्ग किमी की वृद्धि हुई। यह कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.54 प्रतिशत है।झारखंड में वर्ष 2015 के दौरान घने जंगल (वीडीएफ) और सामान्य घने जंगल (एमडीएफ) के क्षेत्र में कमी आई है। वीडीएफ में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि एमडीएफ पिछले दो वर्षों में 6 प्रतिशत घट गया है। गिरावट के लिए बढ़ती खनन गतिविधियां जिम्मेदार हैं। राज्य के खुले जंगल (ओएफ) के क्षेत्र में लगभग 38 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। आईएसएफआर 2017 के अनुसार झारखंड में सघन वन क्षेत्र 2598 वर्ग किलोमीटर है। सामान्य रूप से घना वन क्षेत्र 9686 वर्ग किलोमीटर है। विरल जंगल का क्षेत्रफल 11269 वर्ग किलोमीटर है। कुल जंगल 23,553 वर्ग किलोमीटर है। पश्चिम बंगाल से बेहतर बिहार से कम झारखंड में वन क्षेत्र का विकास पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल (21 वर्ग किलोमीटर) और छत्तीसगढ़ (-12 वर्ग किलोमीटर) से अधिक है। हालांकि, ओडिशा और बिहार ने इस अवधि में क्रमश: 885 वर्ग किमी और 45 वर्गमीटर की वृद्धि दर्ज करके झारखंड से बेहतर किया है। आईएसएफआर ने अपने अवलोकन में कहा है कि झारखंड के वन आवरण में 29 वर्ग किलोमीटर की कुल वृद्धि हुई है। वन क्षेत्र में 314 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। लेकिन बाहरी क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के कारण वन आच्छादन पर इसका प्रभाव देखा गया है।
राष्ट्रीय मानक के करीब पहुंचा झारखंड
पिछले दो सालों में झारखंड के वन क्षेत्रों में 0.04 फीसदी वृद्धि हुई है। केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी भारतीय राज्य वन रिपोर्ट (आइएसएफआर)-2017 के मुताबिक 2015 से 2017 के बीच 29 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र की वृद्धि हुई है। यह कुल वन क्षेत्र 79,716 वर्ग किलोमीटर का 0.04 फीसदी है।
वन विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक (पीसीसीएफ), संजय कुमार के मुताबिक, झारखंड में वन क्षेत्र 32.22 फीसदी तक पहुंच गया है जो राष्ट्रीय वन नीति के मानक 33 फीसदी के बहुत करीब है। भारतीय वन सर्वेक्षण की द्विवार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल  6,778 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। यह कुल क्षेत्रफल का 21.54 फीसदी है।