क्या सचमुच खुले में शौच से मुक्त हुआ झारखंड?

2018-12-26

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-मो. असगर खान

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वैसे झारखंड में  खुले में शौच मुक्त की हकीकत कुछ और है। रांची शहर से महज़ 20 किलोमीटर की दूरी पर नामकुम प्रखंड में करीब 500 घरों वाले डोंगरी गांव में 400 घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है। सुदूर गांवों की स्थिति और भी बुरी है. झारखंड कागजों पर तो तेजी से बदल रहा है लेकिन हकीकत ये है कि यह राज्य हर क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है।
कागजी खानापूर्ति
कोडरमा की मरकच्चो दक्षिणी पंचायत स्थित भगवतीडीह गांव में खुले में शौच के लिए गई 12 वर्षीय बच्ची मधु को कुत्तों ने नोंचकर मार डाला। इस हृदय विदारक घटना ने लगभग हर संवेदनशील व्यक्ति को जहां झकझोर कर रख दिया। वहीं सरकार के कागजी आंकड़ों और खुले में शौच से मुक्ति के तहत ओडीएफ को लेकर किए जा रहे दावों की हकीकत भी बयां कर दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि पूरे कोडरमा जिले को 23 सितंबर, 2017 को ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। उससे भी बड़ी बात यह कि मरकच्चो के जिस भगवतीडीह गांव में यह घटना घटी, उसी गांव से पूरे जिले को ओडीएफ करने की शुरुआत हुई थी। तकरीबन 200 की आबादी वाले 60 घरों के इस गांव में सिर्फ 40 घरों में ही शौचालय है, अन्य 20 घरों के लोग शर्मिंदगी झेलते हुए खुले में शौच करने को मजबूर हैं और अपनी बदनसीबी व गरीबी को कोस रहे हैं। यह हाल इस अभियान से जुड़े ठेकेदारों की अकर्मण्यता के कारण है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत योजना को धक्का लगा है। इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है, ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
झारखंड में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें शौच के लिए गई महिला या युवती को अगवा कर दुष्कर्म की वारदात हुई है। शहरी निकायों में नगर विकास विभाग के जिम्मे ओडीएफ के तहत शौचालय निर्माण का काम है तो ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व स्वच्छता विभाग इसकी नोडल एजेंसी है। यह घटना इन विभागों के लिए भी शर्मनाक है, जिनके ऊपर ही पूरी जिम्मेदारी है। जरूरत है ऊपर से निचले स्तर तक के प्रशासनिक, गैर प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मियों व ठेकदारों पर कड़ी कार्रवाई की। जिन्होंने सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर जिले को खुले में शौच से मुक्त दिखाकर सरकार से अपनी पीठ थपथपाई और जमीन पर स्थिति जस की तस रही। प्रशासनिक वाहवाही लूटने के लिए फर्जी रिपोर्ट तैयार करने वाले ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई हो जिससे कोई भी व्यक्ति ऐसी गैर जिम्मेदाराना हरकत करने से पहले दस बार सोचे। साथ ही यह संदेश भी जाए कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा गरीबों व आमलोगों के लिए चलाए जा रहे अभियान का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, जिनके लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। फिर कोई मधु इस तरह आदमखोर कुत्तों का निवाला न बन सके और उसकी मां इसे अपनी बदनसीबी मान सिसकने को मजबूर न हो।
2019 तक खुले में शौच मुक्त राज्य नहीं बन पाएगा झारखंड
रघुवर की भाजपा सरकार सूबे को स्वच्छ झारखंड बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है, लेकिन 2019 तक झारखंड स्वच्छ भारत मिशन नहीं हो सकता हैं। 2019 को जब देश के कई राज्य खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ फ्री) का जश्न मना रहें होंगे, तब झारखंड समेत बिहार, ओडिशा और उत्तरप्रदेश देश के लिए कलंक बनेंगे। हालांकि झारखंड सरकार शौच मुक्त का प्रचार-प्रसार चला रही है. 
जबकि, ओडीएफ फ्री होने के लिए जनांदोलन की जरूरत है. इसके अलावा हमें लक्ष्य तय करने होंगे, जिसके लिए 90 दिन काफी हैं। अभी तक देश के पांच राज्य ओडीएफ फ्री हैं. इनमें हरियाणा, केरल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं। देश के कुल 550 जिलों में से अब तक 150 जिले ही ओडीएफ फ्री घोषित किए गए हैं।
केन्द्र सरकार कर रही मदद
स्वच्छ भारत मिशन अभियान में केंद्र सरकार लगातार झारखंड को मदद कर रही है। अब तक आठ लाख 20 हजार शौचालयों का निर्माण राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ है. 2017-18 में स्वच्छ भारत मिशन पर करीब 1900 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है। अब तक 55 फीसदी ग्रामीण आबादी कवर हो चुकी है। राज्य के 26 प्रखंड, 750 पंचायतें और पांच हजार 20 गांव ओडीएफ फ्री हो चुके हैं। रामगढ़ जिला पहले से ही शौच मुक्त जिला हो चुका है।
झारखंड के 36.94 प्रतिशत गांव ही ओडीएफ 
झारखंड के कुल 29,647 गांवों में से मात्र 10,963 गांव ही खुले में शौच मुक्त हो पाया है। आधे से ज्यादा गांव अभी तक ओ.डी.एफ घोषित नहीं हो पाया है। 36.94 प्रतिशत  गांवों को ही अभी तक ओ.डी.एफ घोषित किया गया है।
मिशाल : 'बहू शौच के लिए बाहर जाए इससे अच्छा बेटा रहे कुंवारा'
सरकार द्वारा करोड़ों रुपये शौचालय निर्माण में खर्च करने के बाद भी इस गांव की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कांडी प्रखंड के हरिहरपुर ओपी अन्तर्गत मझिगावा पंचायत के अनुसूचित जाति के लोगों ने सरकार के खिलाफ एक अहम फैसला लेते हुए मिशाल पेश की है।
इस गांव में शौचालय नहीं रहने के कारण बेटी बहू को लाज शर्म को ताक पर रखते हुए शौच के लिए खुले मैदान में जाना पड़ता है। वहीं, यहां की ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि आखिर शादी के बाद बहू शौच के लिए बाहर जाए इससे अच्छा है कि हमारे बेटे कुंवारे ही रहें। 
जिला प्रशासन को कई बार आदेश दिया गया कि इस जिले को ओडीएफ किया जाये ताकि गढ़वा जिला के हर घर में शौचालय हो और बेटी बहू की इज्जत बचाई जा सके लेकिन जिला प्रशासन के तरफ से इसके लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। 
जिला प्रशासन और पेय जल स्वच्छता विभाग के द्वारा कई संस्था सहित महिला समूह संवेदक को शौचालय निर्माण के लिए कार्य दिया गया ताकि जितना जल्द हो गढ़वा जिला के कई प्रखंडों को ओडीएफ मुक्त किया जा सके। लेकिन विभागीय उदासीनता और जिला प्रशासन की लचर व्यवस्था के कारण यह पूरी न हो सकी। 
दूसरी तरफ जिले के पेय जल स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि ने बताया कि सरकार ने कुछ महीने पहले ही गढ़वा जिला को ओडीएफ घोषित करने का निर्देश दिया है, जिसके अंतर्गत अक्टूबर 2018  तक पूर्ण रूप से इसे शौच मुक्त करा दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण का कार्य गांव के ही स्वंय सहायता समूह और पेय जल स्वच्छता समिति के द्वारा कराया जा रहा है। मझिगावा पंचायत में शौचालय निर्माण का कुल लक्ष्य 810 है, जिसमें 194 शौचालय का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
कई राज्यों से बेहतर है झारखंड
देश में स्वच्छता कवरेज 2014 के 38.7 प्रतिशत से बढ़कर 2018 में 77.25 प्रतिशत हुआ।  केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत झारखण्ड राज्य के कुल 10,963 गांवो को खुले में शौच से मुक्त (ओ.डी.एफ.) घोषित किया गया है। केन्द्रीय पेयजल एवम् स्वच्छता राज्यमंत्री रमेश चंदप्पा जिगाजीनागी ने 5 फरवरी 2018 को राज्यसभा में सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। पेयजल एवम् स्वच्छता मंत्रालय द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, झारखण्ड राज्य के कुल 29, 647 गांवो में से 10,963  गांवो को ओ.डी.एफ. घोषित किया गया। हालांकि,  झारखण्ड राज्य का प्रदर्शन अन्य कई राज्यों जैसे कि अंडमान और निकोबार, असम, बिहार, दादरनगर हवेली, जम्मू एवं कश्मीर मणिपुर, ओडिशा, पुडुचेरी और त्रिपुरा से काफी बेहतर है। अंडमान और निकोबार 0.93 प्रतिशत, असम 29.82 प्रतिशत, बिहार 9.79 प्रतिशत, दादरनगर हवेली 17.39 प्रतिशत, जम्मू एवम् कश्मीर 6.80 प्रतिशत, मणिपुर 24.30 प्रतिशत, ओडिशा 16.34 प्रतिशत, पुडुचेरी 7.92 प्रतिशत और त्रिपुरा 1.65 प्रतिशत से काफी बेहतर है।