कौशल विकास की दिशा की समीक्षा भी जरूरी

2019-01-03

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-उपेन्द्रनाथ पांडेय

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इस वर्ष 12 जनवरी को झारखंड की राजधानी रांची में राज्य सरकार ने अंतरराज्यीय कंपनियों को बुलाकर स्किल समिट किया था। उसमें राज्य सरकार ने दावा किया था कि यह माहौल बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है और पहले ग्लोबल समिट में ही 27,842 युवकों को रोजगार देने का दावा किया गया। इन सभी युवकों को राज्य के विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रशिक्षण दिया गया था। लेकिन चयन से लेकर ज्वानिंग तक युवकों ने यह खुलासा कर दिया है कि ये नौकरियां अस्थायी हैं, तनख्वाह भी कम है, रोजगार अंशकालिक है। युवकों ने यह भी कहा कि दूसरे राज्यों में ले जाकर इन्हें यूं ही छोड़ दिया गया। स्पष्ट था कि योजना सिर्फ दिखावे के लिए ही थी। 
दरअसल, प्रतिवर्ष एक करोड़ रोजगार सृजन की घोषणा के साथ सत्ता में आयी केन्द्र नरेन्द्र मोदी सरकार की खासी आलोचना हो रही थी। उसी की समीक्षा के क्रम में प्रधानमंत्री ने कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण केन्द्र खोलने का आदेश दिया। स्किल इंडिया के तहत इन प्रशिक्षण केन्द्रों की शुरुआत की गयी। युवकों को प्रशिक्षण दिया जाने लगा। झारखंड सरकार ने सभी 24 जिलों में मेगा प्रशिक्षण केन्द्र की शुरुआत की। प्रधानमंत्री की योजना का उद्देश्य हर क्षेत्र में टैलेंट पैदा करना था। अर्थात देश की मांग के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण देना था। वस्त्र उद्योग, आईटी सेक्टर, आॅटो सेक्टर आदि का प्रशिक्षण दिया जाने लगा। उसके बाद समिट का आयोजना हुआ और फिर मामला टांय-टांय फिस्स हो गया।
झारखंड में रोजगार सृजन की दिशा में अपेक्षित काम ही नहीं हुआ है। 2009-10 में नेशनल सैंपल सर्वे की एक रिपोर्ट आयी थी, जिसमें कहा गया था कि झारखंड बेरोजगारी के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। तब यहां के 15-59 आयु वर्ग के 27.6 फीसदी लोग बेरोजगार थे। शिक्षा की कमी, कौशल का अभाव और रोजगार के अवसरों में कमी इसका मुख्य कारण थे। फिर 2011 में केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में बताया था कि झारखंड में 27.4 फीसदी लोग बेरोजगार हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक 29 फीसदी बेरोजगारी है, जिनमें महिला बेरोजगारी दर 44.9 फीसदी है। तब यहां सर्वाधिक नियोजन कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन में था। इस स्थिति को बदलने की कोशिश है कौशल विकास प्रशिक्षण योजना। क्योंकि कंपनियां बार-बार दावा करती हैं कि उन्हें काम के लायक टैलेंट नहीं मिल रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर रोजगार सृजन की दिशा में काम नहीं हो रहा है। हाल के दिनों में पूंजी आधारित अर्थव्यवस्था में जिस तरह से मजदूरों की मांग में कमी आयी है, उस हिसाब से न सिर्फ युवकों को तैयार करने में वक्त लगेगा, बल्कि अवसर पैदा करना भी एक चुनौती है।
35 फीसदी युवाओं को रोजगार चाहिए
झारखंड में करीब 35 फीसदी युवक वर्तमान में रोजगार की मांग कर रहे हैं। 2010 में यहां की 35 फीसदी आबादी किशोर थी। यह आबादी अब युवा बन चुकी है और रोजगार की मांग कर रही है। यह राज्य की सर्वाधिक ऊर्जावान आबादी है, जिसे सही दिशा में लगाना राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य का भविष्य वर्तमान में इन्हीं कंधों पर है। इसे राज्य निर्माण में लगाने की सख्त जरूरत है। राज्य सरकार को सरकारी विभागों के रिक्त पदों की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। यहां के विभिन्न सरकारी विभागों में 50 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। यह संख्या लाखों में है। इन पदों के भरने से न सिर्फ राज्य की बेरोजगारी में कमी आयेगी, बल्कि सभी सरकारी विभागों के कार्य की गति भी तेज होगी। यहां रोजगार के अभाव में ग्रामीण मानव संसाधन शहरों की ओर रुख करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां लड़खड़ा रही हैं। कृषि क्षेत्र में नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के जिन 115 पिछड़े जिलों का चयन किया है, उनमें झारखंड के 19 जिले हैं। इन 19 जिलों में 16 वे जिले हैं, जहां उग्रवाद के कारण विकास की गति धीमी पड़ी हुई थी। इधर, राज्य सरकार ने भी 6 पिछड़े जिलों का चयन किया है। 
यहीं जरूरत है कौशल विकास योजना की दिशा तय करने की। ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से और ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कौशल विकास की जरूरत है। झारखंड में वन आधारित उद्योग, कृषि आधारित उद्योग के विकास और इनसे जुड़े रोजगार के अनुसार युवकों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। बेरोजगार कहां है, पहले इसे चिह्नित करना होगा। फिर यह देखना होगा कि टैलेंट मांग कहां है या फिर स्वरोजगार की जरूरत किन-किन क्षेत्रों में है। राज्य सरकार ने इस चीजों के अध्ययन के बगैर ही प्रशिक्षण दिलाना शुरू कर दिया। इस कारण इस योजना का अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। अब यह जरूरी है कि राज्य सरकार अब तक कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त किये युवकों की स्थिति की समीक्षा करे और उसके बाद इस योजना से जुड़े पदाधिकारी ओर संस्थाओं का उत्तरदायित्व निर्धारित करे। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन और ग्रामीण आधारित कौशल विकास की यहां ज्यादा जरूरत है। राज्य सरकार को झारखंड के गांवों को फोकस करना होगा।