झारखंड में हजारों बेघर, कौन देगा आसरा

2019-02-16

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-प्रमोद जायसवाल

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केन्द्र सरकार और झारखंड सरकार बेघरों को आसरा दिलाने के लिए कई घोषणाएं कीं। इन घोषणाओं पर अमल भी हो रहा है, लेकिन सही तरीके से अमल नहीं होने की वजह से समस्याएं खड़ी हो रही हैं। आंकड़ों की बात करें तो झारखंड के शहरों में कुल 3607 शहरी बेघर हैं. इनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है. जिनकी थोड़ी सामर्थ्य है व तो किसी तरह किराये के मकान में अपने परिवार को आसरा दे रहे हैं, कई परिवार को इस ठिठुरती रात में सड़क के किनारे या किसी मकान, दुकान के कोने में रात बिता रहे हैं।
दरअसल, ये नौबत अपने घरों को पक्का कराने के चक्कर में आयी है. लोगों ने अपने कच्चे घर तो तोड़ दिये, लेकिन अगली किस्त नहीं मिलने से उनके सर की छत ही छिन गयी है. अब उनके सामने दोहरी समस्या आ गयी है। एक तो किस्त देने की और दूसरी परिवार को अस्थायी आसरा देने के लिए किराया भरने की. प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत पक्का घर बनाने के चक्कर में अनेकों परिवारों ने खुद के कच्चे घर तोड़ दिए और बेघर हो गए। दूसरी किस्त नहीं मिलने से निर्माणाधीन पक्के घरों की छत नहीं डल पायी है. कुल मिलाकर सरकार की ओर से राशि का आवंटन नहीं होने के कारण आवासहीन परिवारों की यह दुर्दशा हो रही है. 
नगरपालिका ने पीएम शहरी आवास योजना के तहत पहले चरण में बीएलसी श्रेणी के जिन 409 हितग्राहियों को मकान बनाने के लिए ढाई-ढाई लाख दिए थे वे तो सेटल हो गए लेकिन दूसरे चरण में चयनित 1015 में से 1008 परिवार परेशानी में हैं। इन्हें मई में पहली किस्त के एक-एक लाख रुपए मिल गए थे। इसके बाद इस उम्मीद में कि दूसरी किस्त समय पर मिल जाएगी इन्होंने अपने कच्चे घर तोड़ दिए। निर्माण शुरू किए लेकिन पेढ़ी भरने और दीवारें खड़ी करने में ही पैसा खत्म हो गया। कई मकानों की तो दीवारें भी खड़ी नहीं हो पाई है। डेढ़ दो महीने से ये लोग दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे लेकिन मिल नहीं रही। ऐसे में ना ये पक्के घर की छत डाल पाए और ना खुद का कच्चा घर बचा है।
ठंड से बचने का भी कारगर उपाय नहीं
देशभर में इस समय ठंड का प्रकोप जारी है। झारखंड के किसी भी इलाके में चले जायें, वहां अनेकों बेघर में ठिठुरते हुए 
किसी प्रकार रात गुजारते दिख जायेंगे। राज्य में इन बेघरों को ठंड से बचाने का भी कारगर उपाय नजर नहीं आता। झारखंड के पास गरीब बेघरों को आसरा देने का कोई विंटर एक्शन प्लान नहीं है। कड़कती ठंड में गरीब कहां रहेंगे इसको लेकर सरकार का रवैया भी स्पष्ट नहीं है। इस मामले पर जब सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ गया तो इससे ही समझा जा सकता है कि मामला कितना संगीन है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि झारखंड, जम्मू कश्मीर सहित अन्य राज्यों के शहरी बेघर गरीबों के लिए जल्द ही एक्शन प्लान फाइनल किया जाये।
आपदा प्रबंधन एक्ट में प्रावधान
वर्ष 2005 में पास किये गये आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर रीलिफ फोर्स के गठन का प्रावधान किया गया है। एक्ट के अध्याय दो में यह भी प्रावधान है कि राज्यों में स्टेट डिजास्टर अथॉरिटी का होना जरूरी है। झारखंड में इसकी कवायद शुरू तो हुई पर यह क्रियाशील नहीं हो पायी.
योजनाएं धरातल पर नहीं
झारखंड में आपदा प्रबंधन के लिए कई योजनाएं बनायी गयीं, लेकिन सभी धरी की धरी रह गईं। पहले चरण में 132 लोगों की टीम तैयार करनी थी। इसमें भूतपूर्व सैनिकों को शामिल किया जाना था। एनडीआरएफ की टीम इन्हें प्रशिक्षण देती। मत्स्य मित्रों को आपदा मित्र बनाना था। लगभग 3600 मत्स्य मित्रों को प्रशिक्षण देने की योजना बनायी गयी थी। ये सभी योजनाएं धरी की धरी रह गयीं।
नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार ने एक सर्वे का हवाला देकर बताया कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में स्लम बस्ती में करीब 53 हजार परिवार रहते है, इन सभी को चिह्नित कर 270 से 300 वर्गफीट का मकान उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें दो कमरा, किचन-बाथरूम की सुविधा होगी।
स्लम बस्तियों के लिए आवास योजना
झारखंड ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में स्लम बस्तियों में रहने वाले करीब 53 हजार परिवारों और कम आय अर्जित करने वाले लगभग 74 हजार बेघर परिवारों के लिए (दोनों मिलाकर 1.27 लाख) सस्ते दर पर मकान उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी हुई है। 
इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रति यूनिट एक लाख रुपये की सहायता और राज्य सरकार की ओर से भी प्रति यूनिट एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। वहीं मल्टी स्टोरेज आवासीय भवन का निर्माण लोक निजी सहभागिता (पीपीपी मोड पर) के आधार पर कराया जाएगा। जिसके तहत सरकार की ओर से सरकारी या पीएसयू की जमीन उपलबध करायी जाएगी, इस पर प्राइवेट डेवलपर को 55 प्रतिशत एरिया में गरीबों के लिए मकान बनाना होगा और शेष 45 प्रतिशत का उपयोग डेवलपर द्वारा अपने वाणिज्यिक या आवासीय उपयोग के किया जा सकेगा।
इसी तरह से कम आय वाले 74 हजार परिवारों (सलाना तीन लाख रुपये से कम आय) को भी एफोर्डेबल हाउंसिंग के लिए साढ़े सात से आठ लाख रुपये का मकान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए भी मंत्रिपरिषद ने केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) “सबके लिए आवास-2022“ के तृतीय घटक “भागीदारी में किफायती आवास निर्माण“ के अंतर्गत आवासों के निर्माण के संबंध में स्वीकृति दी गई। इस योजना के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करायी जाएगी, जबकि लाभुकों को साढ़े पांच से छह लाख रुपये का भुगतान करना होगा।