जमीन विवादों को खत्म करने का बड़ा कदम

2019-02-16

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-उपेन्द्रनाथ पांडेय

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झारखंड में जमीन को लेकर कई तरह की समस्याएं सरकार के पास आती रहती है। कई समस्याएं तो ऐसी होती हैं, जिनके निपटारे में पसीने भी छूट जाते हैं। थानों , अंचलों और अनुमंडलों में ऐसी समस्याओं से जुड़ी फाइलों की भरमार देखी जा सकती है। सरकार ने भी इससे निपटने के लिए उपाय ढूंढ लिये हैं। इसने निर्णय किया है कि अब जमीन की रजिस्ट्री के समय ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया कर ली जायेगी। अब देखना है कि यह उपाय कितना कारगर साबित होता है।
राज्य सरकार झारखंड में जमीन विवादों को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। भू-राजस्व विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके तहत अब जमीनों का निबंधन और दाखिल-खारिज (रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन) एक साथ होंगे। इस प्रक्रिया के लिए अधिकारियों के पास कार्य निष्पादन का समय निर्धारित रहेगा, ताकि अनावश्यक विलंब नहीं हो। 
दरअसल, जमीन विवाद झारखंड में प्रशासनिक अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन चुका है। यह विवाद प्रशासनिक अधिकारियों के समय का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर देता है। साथ ही विधि-व्यवस्था की समस्या भी उत्पन्न करता है। राज्य में थानों, अंचल अधिकारियों, अनुमंडलाधिकारियों और जिलों के उपायुक्तों के पास हर दूसरा या तीसरा व्यक्ति जमीन विवाद का आवेदन लेकर पहुंच जाता है। इस कारण हर कार्यालयों में जमीन विवाद के आवेदनों की फाइलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दूसरी ओर राज्य में जमीन दलालों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार हो चुका है। इस नेटवर्क में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, पुलिसकर्मी और राज्य सरकार के कई अधिकारी भी शामिल बताये जाते हैं। जमीन दलालों के विवाद में अक्सर राज्य में, खासकर राजधानी रांची में कई आपराधिक घटनाएं घट चुकी हैं। जमीन विवाद में कई हत्याएं भी हो चुकी हैं। 
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जमीन विवाद और उससे जुड़े विभिन्न श्रेणी के अपराधों से निपटने में यहां प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का काफी समय खर्च हो जाता है, जिससे राज्य के विकास के कई मूल कार्य बाधित और विलंबित हो जाते हैं।
सूत्रों ने बताया कि इन्हीं कारणों से भू-राजस्व विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसमें जमीन का निबंधन और दाखिल-खारिज एक साथ होंगे। जमीन के निबंधन के लिए जैसे आवेदन आयेंगे, पहले अंचलाधिकारी से उसकी रिपोर्ट मांगी जायेगी। रिपोर्ट आते ही निबंधन कर दिया जायेगा। साथ में दाखिल-खारिज भी हो जायेगा। इससे अधिकतम जमीन विवाद समाप्त हो जायेंगे। साथ ही उसी जमीन का निबंधन होगा, जो साफ-सुथरी होगी। इससे दलालों की मनमानी भी बंद हो जायेगी। 
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार एक साथ निबंधन और दाखिल-खारिज का कानून भारत में सिर्फ कर्नाटक में लागू है। इनके अलावा कई देशों में यह कानून लागू है और अपने उद्देश्यों में सफल भी है। जहां भी यह कानून लागू है, वहां जमीन निबंधन की कार्य प्रणाली में सुधार हुआ है, जमीन विवाद कम हुए हैं, साथ ही अपराध भी कम हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस कानून के लागू होने से झारखंड को एक नयी सकारात्मक दिशा मिलेगी। 
उपायुक्त रायमहिमापद रे ने भी कहा कि एक साथ जमीन का निबंधन और दाखिल-खारिज कानून की बात अभी सरकार स्तर पर है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव सामने आने पर ही विशेष जानकारी मिल पायेगी।