विकास शब्द की कोई परिभाषा होती है क्या?

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-अनन्या दास

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अभिधान में तो मिल जाएंगी, लेकिन असली दुनिया में विकास कुछ और ही है। यहां अमेरिका में हमारे घर से आधे घंटे की दूरी पर कुछ ऐसे लोग रहते हैं जिन्होंने विकास को अपने जीवन का हिस्सा बनाने से इनकार कर दिया है। उन्हे 'आमिश' कहते हैं। दूसरे विश्व युद्ध के समय यह लोग यहां आये थे। इनके विचार से विकास ही सारी दुख और परेशानियों की जड़ है। इसीलिए तो दुनिया के सबसे विकासशील देश में रहते हुए भी उन्होंने विकास का बहिष्कार कर रखा है! उनके घरों में बिजली की बत्ती नहीं जलती, टेलीफ़ोन, टीवी या मोबाइल का तो दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं है। सादगी को जिंदगी का स्वरूप बना लिया है उन्होंने। तेज रफ़्तार से चलती हुई गाड़ियों के बीच घोड़े गाड़ियों में बैठकर इधर-उधर जाते हैं वो। कृषि और पशुपालन उनकी जीविका है। यह बात सही है की सरकार से मदद मिलती है उन्हें इस तरह की जिंदगी बिताने के लिए वरना यह तो मुमकिन नहीं था। कोई उनसे पूछे तो वो यही कहते हैं कि हम विकास के सहारे के बिना ही खुश हैं, बहुत खुश। विकास की लाठी हमें नहीं चाहिए। विकास एक ऐसा शब्द है जिसकी परिभाषा हर पल हर वक्त बदलती रहतीहै। यह एक बहुमुखी शब्द है। हम जिसे विकास कहते हैं वह भी कभी एक-सा नहीं रहता। जैसे मनुष्य ने जब पहली बार आग या पहिए का आविष्कार किया था तो उस जमाने में वह तो विकास का बेहतरीन नमूना था, लेकिन आज अगर कोई कहे कि मैंने आग का अविष्कार किया है तो लोग हंसेंगे उसे विकास तो कोई नहीं कहेगा! किसी एक देश की उन्नति भी दूसरे देश की उन्नति से अलग है। एक देश के लिए जो विकास है ज़रूरी नहीं कि दूसरे देश के लिए भी वही हो। कोई बीमार है तो उसकी अवस्था में उन्नति ही उसके लिए विकास है। जो बैसाखियों के सहारे चलता है उसके लिए उनके बिना दो कदम चलना ही उन्नति है और प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे खिलाड़ी के लिए दौड़ में दो सेकेंड समय कम लेना ही विकास है! वैसे मनुष्य जाति ने काफ़ी विकास कर ही लिया है ऐसा कहा जा सकता है। 1900 सदी तक आदमी की आयु लगभग 30 साल थी। बीसवीं सदी तक विकसित देशों में भी 50 साल से ज़्यादा गड़ आयु देखने को नहीं मिलती थी। आज पूरे विश्व में गड़ आयु 67.9 साल हो चुकी है। इसे तो ज़रूर विकास का प्रभाव कहा जा सकता है। चिकित्साशास्त्र, नयी-नयी दवाइयों का अविष्कार सब विकास की ही तो देन है। आम आदमी की आय भी विकास के चलते काफ़ी ज़्यादा हो गयी है। दो शताब्दियां पहले की सालाना आय से अभी आय लगभग 10 गुना ज़्यादा हो चुकी है। विकास के कुछ विनाशकारी पहलू भी हैं। परमाणु बम का अविष्कार विकास या प्रगति का एक हिस्सा माना जा सकता है मगर कुछ लोगों के विचार में ऐसे अविष्कार जो दुनिया के विनाश में सहायक हैं उन्हें विकास का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। वो सिर्फ़ हमें पीछे की ओर ही ले जायेंगे। एक तरफ आमिश लोग हैं और दूसरी तरफ वह दुनिया जो की निरंतर विकास की ओर भागी जा रही है। हमारे खुद के घरों में कितनी चीज़ें हैं जो विकास की देन है और जिनके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। छोटे-छोटे बच्चे भी आजकल मोबाइल का इस्तेमाल सीख गये हैं। पर कुछ बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलने की इतनी बुरी लत लग जाती है कि उनका वास्तविक जीवन के साथ कोई ताल्लुक ही नहीं रहता। विकास के कुफल में से यह एक है। कुछ लोगों का मानना है की मानसिक विकास ही सबसे बड़ा विकास है। कभी-कभी यह भी देखने को मिलता है कि विकासशील देशों में भी मानसिक रूप से काफ़ी पिछड़े हुए से लोग रहते हैं। इन लोगों के दिमाग़ में गर्भपात और जन्मनिरोधक जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विरुद्ध भी विपरीत भावनाएं हैं। गगनचुंबी इमारतों के साए में बैठकर भी मानसिक विकास से मुंह मोड़ लेने वालों को विकसित देश के नागरिक मान लेने में भी परेशानी होती है! यह कहा जा सकता है कि विकास की वजह से दुनिया आज हर तरह के सुख भरी पड़ी है। हमारा जीवन बहुत सहज हो गया है। फिर भी यह तो हम कह नहीं सकते कि हमारी दुनिया पूरी तरह से विकसित हो चुकी है, क्योंकि चाहे कितने भी ऊंचे मकान या बड़े महल बन जाएं, आदमी चांद की धरती पर पांव रख दे या समुद्र का सीना चीर डाले पर जब तक यहां भूखे, नंगे लोग रहेंगे या फिर ऐसी बीमारी से लोग मारे जायेंगे जिनका कि इलाज हो सकता था, तब तक हम विकसित कह नहीं सकते अपने आपको। तब तक विकास की गुंजाइश हमेशा रह जाएगी।