शहरों की चका चौंध से विकास का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-सुल्तान अहमद

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शहर की खूबसूरत, गगन चुम्भी, विजली से जगमगाती इमारतों , लम्बे चौरे पुल ,चार लाइन वाली सडकें और उस पर दन दनाती गाड़ियों के हुजूम को देखकर तो ऐसा लगता है जैसे वाकई मैं हमारा देश अब बदल गया और अब यहाँ कोई गरीब नहीं रहता. आए दिन खबरें देखने और सुनने को मिलती की बीमारू राज्य बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा मध्य प्रदेश में गरीबी के कारन और स्वास्थ सुविधा के आभाव में गर्भ वती माताएं और नवजात शिशु प्रसव के दौरान ही दम तोर देते, वहीँ किसान क़र्ज़ की बोझ से निजात पाने के लिए आत्महत्या करने को मजबूर हैं . 14 वीं लोक् सभा चुनाव में विकास का मुद्दा जोर पकरा था लेकिन न जाने कहाँ वो विलुप्त होगया ,राज्यों की सरकारें कहते नहीं थकते की हमने राज्य स्तर पर सबसे जयादा विकास किया है, तो फिर आखिर जनता मैं इतना आक्रोश क्यों हैं . विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्रीयों ने इस बात को मान लिया है की आज देश के लिए सबसे बरी समस्या आय मैं असमानता है. विकास की धारा गाँव तक क्यों पहुंचे पहुँचते दम तोर देती, जनता को साफ़ पानी मुहैया नहीं हो पाता, सड़क विजली ,स्वस्थ तो नदारद. लंदन में रिचर्ड डिमब्लेबी आई एम् एफ की प्रतिनिधि व्याख्यान देते हुए कहा, 'भारत में अरबपति समुदाय मैं तीब्र गति से वृद्धि हुई है पिछले , 15 साल में 12 गुना वृद्धि हुई है जिसके जरिये भारत की गरीबी को मिटाने का काम किया जासकता था जो की नहीं हुआ. एक अध्यन के मुताबिक 71% शहरी आबादी के पास सूचना के आदान प्रदान के लिए मोबाइल फ़ोन में इन्टरनेट कनेक्शन उपलब्ध है वहीँ भारत जिसको गांवों का देश देश कहा जाता है जहाँ की तक़रीबन 70 फीसद आबादी गाँव में रहती है जिनके पास मीडिया का दूसरा माध्यम बहोत मुश्किल से पहूंचता है नतीजा भारत जैसे विशाल देश की बड़ी आबादी सूचना के आभाव में जिंदगी व्यतीत कर रही है. इसमें कोई दो राय नहीं की भारत में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल बढ़ा है इसकी उपयोगिता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जासकता है की भारत सरकार की उपक्रम जो मोबाइल फ़ोन और इन्टरनेट पर नज़र रखती है के अनुसार 988.7 मिलियन लोगों के पास मोबाइल फ़ोन है. इस बात का अंदाजा हम और आप इस बात से भी लगा सकते हैं की आम तौर पर घड़ों में चाहे सोचालय न हो लेकिन मोबाइल फ़ोन जरूर देखा जा सकता है. बिहार, झारखण्ड और मध्य प्रदेश के गाँव के दौरे के दौरान देखा है की जिन गाँव में बिजली नहीं पहुंची शाम को जनरेटर द्वारा स्थानीय व्यापारी गाँव वालों को विजली देते हैं और प्रत्येक बल्ब की दर से व्यय करना होता है साथ में मोबाइल रिचार्ज सुविधा मिलती है , जिस गाँव मैं जनरेटर की भी सुविधा नहीं हैं वहां के गाँव वासी दुसरे गाँव से मोबाइल चार्ज करके लाते हैं और अपने परिजोअनों से बात करने का आनंद उठाते है. मोबाइल फ़ोन की बढती लोकप्रियेता और जिंदगी को बेहतर बनाने की उपयोगिता को देखते हुए दिल्ली स्थित ग्राम्वानी सामुदायिक मीडिया ने मोबाइल वाणी का सुभारम्भ किया . मोबाइल वाणी कार्यक्रम के तहत देश के दूरदराज के नागरिकों को स्वायत्ता मिली की वह घर बैठे ख़बरों, सांस्कृतिक कार्यकर्मों, सामाजिक मुद्दों पर मोबाइल वाणी द्वारा चलाये जारहे अभियानों को सुनें और जब भी दिल चाहे चल रहे कार्यक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें .मोबाइल वाणी द्वारा बिहार , झारखण्ड , मध्य प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में 400 से अधिक सामुदायिक रिपोर्टरों का चयन , उनको प्रशिक्षित कर स्थानीय समुदाय के सन्दर्भ की खबरें , समुदायों को प्रशिक्षित कर अपनी राय , सुझाव, प्रतिक्रिया मोबाइल वाणी पर रिकॉर्ड करने के लिए प्रेरित करते हैं और प्रत्येक दिन 200 से ज्यादा खबरें मोबाइल वाणी पर रिकॉर्ड कर प्रसारित किया जाता है. मोबाइल वाणी पर ख़बरों का प्रसारण जरूरी कैसे ? स्थानीय मुख्य धरा की समाचार पत्र, टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाली खबरें शहरों , राजनीती , सिनेमा , घटना दुर्घटना पर आधारित होती हैं. मुख्या धरा की मीडिया के लिए प्रखंड के गाँव में रह रहे समुदायों की खबरें को प्रसारित या प्रकाशित करने के लिए न ही जगह है न ही यह समुदाय उनके लिए उपभोग की वास्तु नतीजा इन समुदाय से जुडी कोई भी खबरें मीडिया के लिए सुर्खियाँ नहीं बनती.हैरत तो तब होती जब जब हम देखते हैं की ग्रामीणों को मिलने वाले अखबार एक तो विलम्ब के साथ मिलता है और दूसरा इनसे अख़बारों का मूल्य भी जयादा लिया जाता है लेकिन इनके या इनके समाज की कोई खबरें इन समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं होती.मोबाइल वाणी के सामुदायिक रिपोर्टर स्थानीय ख़बरों का संकलन, संपादन रिकॉर्डिंग और प्रसारण करते हैं. ख़बरों के प्रसारित होने के बाद समुदाय को खबरें सुनने के लिए उनके मोबाइल पर साझा किया जाता है जिससे उनको तुरंत पता चलता है की उनके समुदाय की खबरें प्रसारित हो रही हैं . ख़बरों के संकलन के लिए प्रखंड स्तर पर सामुदायिक रिपोर्टर और फिर ग्राम स्तर पर स्वेक्षित कार्यकर्ता होते हैं जो उस समुदाय की खबरें ,जन मुद्दों पर समुदाय का साक्षात्कार लेते हैं और मोबाइल वाणी पर प्रसारित करते हैं जिसे समुदाय बड़े चाव के साथ सुनती है और आनंदित होती है, मोबाइल वाणी के स्थानीय सामुदायिक रिपोर्टर न केवल ख़बरों का संकलन और प्रसारण करते हैं बल्कि ख़बरों के प्रसारण के बाद सम्बंधित अधिकारयों –हितधारकों को ख़बरों पर कार्य करने के लिए प्रेरित भी करते हैं अर्थात जनशिकायतों पर प्रसाशनिक अधिकारी त्वरित कार्रवाई भी करते हैं. मोबाइल वाणी द्वारा समस्या का समाधान एक अतुल्निय पहल जमुई जिला से चंद्रेसेखर आज़ाद , अमित कुमार सविता , रजनी कुमार सिंह का कहना है जिले के अलीगंज प्रखंड अंतर्गेत अहिल्या गाँव के एक स्कूल में मध्यान भोजन में अनियमितता वर्ती जारही थी , मध्यं भोजन में अनियमितता बिहार , झारखण्ड , और मध्य प्रदेश के लिए आम समस्या है इसलिए और कोई मीडिया इस मुद्दे पर गौर भी नहीं करता , लेकिन जब मोबाइल वाणी के स्थानीय रिपोर्टों ने इस विषय पर समाचार प्रसारित किया , प्रसारण के बाद जिला शिक्षा अधिकारी के साथ मोबाइल वाणी द्वा