गिरपतारी से संबंधित अधिकार

|

तस्वीर द्वारा-

|

लेखक-

image

image

गिरपतारी किसी व्यक्ति को उसकी अपनी स्वंतत्रता से वंछित करने कि प्रक्रिया को बोलते है। साधारण तौर पर यह किसी अपराध की छानबीन के लिए लिए, किसी अपराध को घटने से रोकने के लिए या किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की हानि से रोकने के लिए किया जाता है। मानव अधिकारों की सार्वभौम घोड्ढणा में कहा गया है ”किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार, नजरबंद, या देष निप्कासि नहीं किया जाएगा।“ आइये उदाहरण से समझे गिरफ्तार व्यक्ति के गिरफ्तारी से सबंधित अधिकारः मान लिया जाए ‘क’ जो एक हत्या के मामले में संदिग्ध व्यक्ति है, पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किया जाता है, तो गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस उसके गिरफ्तारी से संबंधित आधार कि क्यों वो गिरफ्तार किया जा रहा है उसे बताएगी तथा गिरफ्तारी स्थल पर ही गिरफ्तारी से संबंधित मेमो तैयार करेगी। गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस अपने अभिरक्षा में 24 घंटे से अधिक नहीं रख सकती, अगर वो ऐसा करती है तो गिरफ्तारी अवैध हो जाएगी और ‘क’ इस आधार पर जमानत का अधिकारी होगा। इस स्थिति में पुलिस तत्काल 24 घंटे के अंदर नजदिकी मजिस्ट्रेट को गिरफ्तार व्यक्ति ‘क’ को पेष करेगा। ‘क’ को एफ0 आई0 आर0 तथा अंतिम रिपोर्ट कि छायाप्रति निःषुल्क लेने का अधिकार होगा। ‘क’ को यह अधिकार होगा कि वह अपने वकील की सलाह ले सकता है। अगर ‘क’ गरीब व्यक्ति है तो पुलिस उसे विधिक सेवा प्राधिकार के जरिए उसे निःश्ुल्क विधि सहायता दिलाएगा। ‘क’ की अगर कोई डाक्टरी जाँच होती है तो उसे रजिस्टर्ड प्रश्क्षित डाक्टर द्वारा जांच कराई जरएगी। अगर ‘क’ की गिरफ्तारी अवैध है या आधारहीन है तो वह मुआवजा पाने का हकदारी होगा । आइयें जाने गिरफ्तार व्यक्ति के जमानत संबंधी अधिकार अगर अभियुक्त/दोड्ढी व्यक्ति किसी जमानतीय अपराध का दोड्ढी है तो उसे यह अधिकार होगा कि वह जमानत पर रिहा किया जाए। यह पुलिस अधिकारी का कर्त्तव्य है कि उसे बताए कि वह जमानतीय अपराध का दोड्ढी है। अगर अभियुक्त खुद किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष आत्मसमर्पण करता है तो उसे जमानत लेने का उसी समय अधिकार होगा या वह उस समय ही न्यायिक हिरासत की मांग कर सकता है। इसी तरह यहि गिरफ्तार व्यक्ति के विरूद्व चार्ज श्ीट 60 दिन या 90 दिन के भीतर फाइल नहीं किया जाता है तो वह इस आधार पर जमानत पाने का अधिकारी हो जाता है। ;सी0 बी0 आई0 बनाम अनुपम जें0 कुलकर्णी 1992द्ध अगर गिरफ्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट रविवार या छुट्टी के दिन न्यायिक हिरासत में भेजता है तो उसकी जमानत याचिका रविवार या छुटटी के दिन ही सुनी जानी चाहिए। गिरफ्तार से संबंधित महिलाओं के अधिकार अगर कोई महिला पुलिस कि दृष्टि में अपराधी है और पुलिस उसे गिरफ्तार करने आती है तो पुलिस को सर्वप्रथम उसे गिरफ्तार का कारण बताना होगा। गिरफ्तार के समय उसे हथकडी नहीं लगाया जाएगा, हथकडी सिर्फ मजिस्ट्रेट के आदेष पर लगाया जा सकता है। गिरफ्तार महिला को यह अधिकार होगा कि वह अपने वकील को बुलाए या वह वकील रखने में असमर्थ है तो वह उसी समय मुक्त कानूनी सलाह की मांग कर सकती है। गिरफ्तार महिला को 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेष करना अनिवार्य है। गिरफ्तारी के समय स्त्री के किसी रिष्तेदार या मित्र को उसके साथ थाने ले जाने का अधिकार है। अगर पुलिस महिला को गिरफ्तार करके थाने ले जाती है तो उसे महिलाओं के कमरे में रखा जाएगा। पुलिस द्वारा मारे-पीटे जाने या दुर्व्यवहार किए जाने पर उसे यह अधिकार होगा कि वो मजिस्ट्रेट से डाक्टरी जाँच की माँग करे। इस स्थिति में महिला कि डाक्टरी जाँच केवल महिला डाक्टर ही करेगी। महिला अपराधियों के साथ पूछताछ के दौरान कभी-कभी छेडछाड के भी मामले समाने आते है इसलिए महिला पूछताछ से संबंधित अपने अधिकारों को इस तरह इस्तेमाल कर सकती है कि महिला से पूछताछ केवल महिला के घर पर अथवा उसके परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में ही की जाएगी तथा पूछताछ के लिए वह अकेले थाने पर जाने से इन्कार कर सकती है। यदि उसके श्रीर कि तलाश्ी की जाती है तो ऐसी स्थिति में महिला पुलिस ही उसकी श्रीर कि तलाषी लेगी। अपनी तलाषी से पहले वह महिला पुलिसकर्मी की तलाषी ले सकती है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने डी0 के0 बासु बनाम स्टेट ऑफ बंगाल में अधिकारी को गिरफ्तारी से पूर्व निम्न निर्देशें का पालन का निर्देश् दियाः . अगर कोई व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी किया जाता है तब गिरफ्तारी करने वाला या जाँच करने वाला पुलिस अधिकारी का नाम सही और स्पप्ट होना चाहिए। ऐसे पुलिस अधिकारी का जो गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ करते है, उनका विवरण रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए। . गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मी गिरफ्तारी के समय एक मेमो बनाएगा जो कम से कम दो साक्षियों द्वारा प्रमाणित होगी जो गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार के होगे या मोहल्ले के प्रतिष्ठित व्यक्ति हांगे। . गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसके एक मित्र, संबंधी या किसी अन्य व्यक्ति जिसको वह जानता हो या जिसे उसकी कुश्लता में दिलचस्पी हो, को इसकी सूचना दी जाए। . पुलिस गिरफ्तार का समय, स्थान, अभिरक्षा के स्थान की सूचना गिरफ्तार व्यक्ति के मित्र को देगा या यदि वह जिले से बाहर रहता है तो विधिक सहायता संस्था या उस क्षेत्र के पुलिस केन्द्र के माध्यम से तार द्वारा गिरफ्तारी की सूचना 8 से 12 घटे के भीतर अवष्य देगा। गिरफ्तार व्यक्ति को इस अधिकार के बारे में जानकारी होनी चाहिए कि उनकी गिरफ्तार की सूचना यथाश्ीघ्र किसको दी गई है। . गिरफ्तारी के स्थान पर ही गिरफ्तारी की सूचना डायरी में दर्ज करनी होगी जिसमें उस मित्र के नाम का उल्लेख होगा जिसे गिरफ्तार की सूचना दी गई है और पुलिस कर्मचारी के नाम और विवरण का उल्लेख होगा जिसके अभिरक्षा में गिरफ्तार व्यक्ति है। गिरफ्तार व्यक्ति यदि प्रार्थना करता है कि उसकी उसकी जॉच कराई जाए तो उसके श्रीर में पायी गई छोटी या बडी चोटो को भी दर्ज किया जाएगा। . व्यक्ति की गिर