लेखक परिचय

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-शैलेन्द्र कुमार सिन्

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पिछले 15 वर्षों से ग्रासरूट जर्नलिस्ट के रूप में झारखंड के ग्रामीण समस्याओं पर मेरे आलेख देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में चरखा,नई दिल्ली के माध्यम से प्रकाशित हुए हैं।आदिवासी परंपरा,संस्कृति,स्वास्थय,पलायन,कुपोषण को लेकर आलेख प्रकाशित हुए हैं।हाशिये पर जी रहे अवाम,बेजूबान की आवाज को मैंने आलेख के माध्यम से नीति निर्माता तक उनकी बातों को पहुॅचाया है।दिल्ली से प्रकाशित सोपान -स्टेप मासिक प्रत्रिका में मेरे आलेख नियमित रूप से प्रकाशित होते आ रहे हैं।नई दिल्ली से ग्रासरूट जर्नलिस्ट अवार्ड,मुझे प्राप्त हुआ है और दो बार फैलोशिप,एनएफआई और केयर से आदिवासी के स्वास्थय व परंपरा के लिए मिला।मेरे आलेख हिन्दू,योजना,कुरूक्षेत्र,पायोनियर,सिविल सोसायटी,शुक्रवार,दिल्ली,कृषि टुडे,दिल्ली,हिन्दुस्तान,रांची एक्सप्रेस,मंथन से प्रकाशित पत्रिका में हाशिये के स्वर में प्रकाशित हुए हैं।मेरे आलेख हिन्दी,अंग्रेजी,उर्दु,संताली व बंगला में अनुवादित होकर नियमित रूप से इंडिया वाटर पोर्टल,आर्यावर्त डॉट काम,प्रवक्ता डॉट काम सहित कई इंटरनेट वेबसाईट पर प्रकाशित होते रहे हैं।मैं नियमित रूप से लेखन कार्य से जुडा हुॅ।मैं आईबीएन सेवन के सिटीजन जर्नलिस्ट के रूप में भी कार्य किया है।मेरी चर्चित सक्सेस स्टोरी श्यामल चौधरी रहा,जिसने 14 साल में अपने दम पर तालाब खोदा,इसे कई न्यूज चैनल और वेबसाईट ने दिखाया,जो गौरव की बात है।