अनुसूचित जाति एवं अनुसूचति जनजाति

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1. ‘क’ और ‘ग’ दो व्यक्ति है, दोनों के बीच किसी बात का लेकर विवाद हो जाता है ‘ग’ जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है ‘क’ जो अनुसचित जाति एवं अनुसूचित जाति का सदस्य है को उस विवाद में उसकी जाति को लेकर अपश्ब्द बोलता है या उसके जाति का नाम लेकर अपमानित करता है तो ‘ग’ अनुसूचित जाति एंव अनुसूचति जनजाति ;अत्याचार निरोधकद्ध अधिनियम, 1989 के तहत दोड्ढी होगा। परन्तु अगर ‘ग’ ‘क’ के जाति के नाम पर अपश्ब्द या जाति का नाम ‘क’ को जानबुझ कर अपमानित करने के उद्देष्य से नहीं कहा है और ये बात लोकजन के सामने नहीं कहा है, उकसे अकेले में कहा है तो वह अनुसूचित जाति एवं अनुसूचति जनजाति ;अत्याचार निरोधकद्ध अधिनियम, 1989 के तहत दोड्ढी नहीं माना जायेगा। ;गौरा गोविन्दा दास बनाम उड़िसा राज्यद्ध 2. ै अनुसूचित जाति एवं अनुसूचति जनजाति ;अत्याचार निरोधकद्ध अधिनियम, 1989 यह कानून एस0 सी0, एस0 टी0 वर्ग का सम्मान, स्वाभिमान, उत्थान एवं उनके हितों की रक्षा के अलावा इन जातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद-17 के आलोक में ये विधान पारित किया गया है। छुआछूत संबंधी अपराध एवं दलितों पर अत्याचार के विरूद्ध इस अधिनियम में कठोर दंड के प्रावधान किए गए है जो गैरजमानतीय और असुलहनीय है। यह अधिनियम उस व्यक्ति पर लागू होता है जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचति जनजाति का सदस्य नहीं है और उसी वर्ग के सदस्यों पर अत्याचार करता है। आईये अब हमलोग जानते हे किस तरह के अत्याचार होने पर इस अधिनियम के तहत दण्डनीय अपराध होगा। यह व्यक्ति जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचति जनजाति का सदस्य नहीं है और ऐसे वर्ग में आने वाले सदस्यों को जबरन अखाद्य एवं घृणाजनक ;मल-मूल इत्यादिद्ध पदार्थ खिलाता या पिलाता है। ऐसे सदस्यों को शरीरिक चोट पहुँचाता है या उनके घर के आसपास या परिवार में उन्हें अपमानित करने या क्षुब्ध करने की नियत से कुड़ा-कड़कट, मल या मृत पश्ु का श्व फेंक देता है। उसके श्रीर से बलपूर्वक कपड़ा उतारता है या उसे नंगा करके या उसके चेहरे पर पेंट पोत कर सार्वजनिक रुप में घूमाता है या इसी प्रकार का कोई ऐसा कार्य करता है जो मानव के सम्मान के विरूद्ध हो। ऐसे सदस्य के आवंटित भूमि पर गैर कानूनी ढंग से खेती काट लेता हे या जोत लेता है या उस भूमि पर कब्जा कर लेता हैं गैर कानूनी ढंग से उनके भूमि से बेदखल कर देता है और कब्जा कर लेता हे या उनके अधिकार क्षेत्र की सम्पतित के उपभोग में हस्क्षेप करता है। ऐसे सदस्यों को भीख मांगने के लिए मजबूर करता है या उसे बंधुआ मजदूर के रुप में रहने के विवश् करता है या फुसलाता है। ऐसे सदस्यों को वोट नहीं देने या किसी खास उम्मीदवार के मतदान के लिए मजबूर करता है। ऐसे सदस्यों के विरूद्ध झूठा, परेशन करने के नियत से इसे पूर्ण अपराधिक या अन्य कानूनी आरोप लगाकर फंसाता है या कार्रवाई करता है। किसी लोक सेवक ;सरकारी कर्मचारी/अधिकारीद्ध को काई झूठा या तुच्छ सूचना अथवा जानकारी देता है जिससे अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसी सदस्य को क्षति या क्षुब्ध करने के लिए ऐसे लोक सेवक विधि पूर्ण श्क्ति का प्रयोग करता है। ऐसे सदस्यों को जानबुझ कर जनता के नजर में जलील कर अपमानित करता है या डराता है। किसी महिला सदस्य को अनादर करता या उन्हें अपमानित करने की नियत से श्ील भंग करने के लिए बल प्रयोग करता हैं किसी महिला का उसके इच्छा के विरूद्ध या बलर्पूवक यौनशेड्ढण करता हैं। सदस्यों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले जलाश्य या जलस्त्रोतो को गंदा करता हैया अनुपयोगी बना देता है। किसी सदस्य को सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोकता है या रूढ़िजन्य अधिकारों से वंचित करता है। या ऐसे सदस्य को अपना मकान अथवा निवास स्थान छोड़ने पर मजबूर करता है या करवाता हो। 3. ऊपर वर्णित अत्याचार के अपराधो के लिए दोड्ढी व्यक्ति को छःमाह से पाँच साल तक की सजा, अर्थदण्ड के साथ प्रावधान है। तथा यदि क्रूरतरपुर्ण हत्या के अपराध के लिए मत्यु कि भी सजा है। 4. ‘अ’ जो एक अनुसूचित जाति एंव अनुसूचित जनजाति के सदस्य वर्ग की महिला है को ‘ब’ द्वारा अनादर किया जाता है और उसे अपमानित करने के नीयत से श्ील भंग करने के लिए बल का प्रयोग करता है, परन्तु ‘ब’ को ये पता ही नहीं है कि वह महिला अनुसूचित जाति एंव अनुसूचित जनजाति के सदस्य वर्ग की है, ऐसी परिस्थिति में ‘ब’ अनुसूचित जाति एंव अनुसूचित जनजाति ;अत्याचार निरोधकद्ध अधिनियम, 1989 के तहत दोड्ढी नहीं होगा। ;बालन बनाम केरल राज्यद्ध 5. अधिनियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो अनुसूचित जाति एंव अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है और वह अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के खिलाफ झूठा गवाही देता है या गढता है जिसका आषय किसी ऐसे अपराध में फँसाना है जिसकी सजा मत्युदंड या आजीवन कारवास जुर्माने सहित है, और इस झूठे गढे हुए गवाही के कारण ऐसे वर्ग के सदस्य को फाँसी कि सजा दी जाती है तो ऐसी झूठी गवाही देने वाले मत्युदंड के भागी होगें। 6. यदि वह मिथ्या साक्ष्य के आधार के पर अनुसूचित जाति, अनुसचित जनजाति के किसी सदस्य को किसी ऐसे अपराध के लिए दोड्ढ सिद्ध कराता है जिसमें सजा सात वर्ड्ढ या उससे अधिक है तो वह जुर्माना सहित सात वर्ड्ढ की सजा का दण्डनीय होगा । 7. आग अथवा किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा किसी ऐसे मकान को नष्ट करता है जो अनुसूचित जाति, अनुसचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा साधारणतयः पूजा के स्थान के रूप में या मानव स्थान के रूप में उपयोग किया जाता है, वह आजीवन करावास के साथ जुर्माने से दण्डनीय होगा। 8. कोई भी सरकारी कर्मचारी/अधिकारी जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, अगर वह जानबूझ कर इस अधिनियम के पालन करने में लापरवाही करता है तो वह ढंड का भागी होगा तथा उसे छः माह से साल तक की सजा हो सकती है।