पहाड़ से गाँव को पालने का प्रयास

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-सुधीर पाल

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ओरमांझी के गगारी पंचायत की मुखिया सुनीता देवी एक बार गगारी पहाड़ को निहारती है और कहती है- ब्रिटिश काल से यह नंगा है .यह पहाड़ हमारे पुरखों की यादों को समेटे हुए है और अब हम इसे बिन पेड़ के पहाड़ नहीं होने देंगे. हम ग्रामीणों की सहायता से पहाड़ की मिटटी को नीचे नहीं उतरने देंगे. वर्षा के पानी को पहाड़ में जगह जगह गड्ढा बनाकर रोकेंगे. मेड बना रहें हैं, भूक्षरण को रोकने के लिए बोल्डर पिचिंग कर रहें हैं. इस काम के लिए पहाड़ मेला लगाया जा रहा है. इस मेले में आस -पास के ६० गांवों के लोग भाग ले रहे हैं. सुनीता देवी ने फारेस्ट डिपार्टमेंट के पीसीसीएफ को एक पत्र लिख कहा है कि फारेस्ट डिपार्टमेंट यहाँ पौधे लगाये और इस पहाड़ को हरा- भरा करे. यह पत्र आग्रह भर नहीं है. मुखिया ने लिखा कि यदि डिपार्टमेंट यह काम नहीं करेगा तो पंचायत ग्राम सभा के माध्यम से यह कार्य स्वयं करेगी. १६ फ़रवरी २०१६ को फारेस्ट डिपार्टमेंट को पत्र लिखने के साथ ही ग्राम सभा ने इस पहाड़ पर पौधरोपण का काम शुरू कर दिया है. गाँव के देवेंदर नाथ ठाकुर कहते हैं- सरकार के भरोसे हम बैठने वाले नहीं हैं. नर्सरी तैयार करने का काम पूरा हो गया है. पांच लाख पेड़ लगाने का काम अगले पखवाड़े शुरू हो रहा है. पहाड़ पर पतई, कचनार, बेल, आम, जामुन, ईमली, महुआ के पेड़ लगाये जा रहें है. मुखिया कहती है, इस काम को अंजाम देने के बाद गाँव के लिए गगारी पहाड़ एसेट हो जायेगा. मुखिया कहती हैं, १० सालों में हम इस पहाड़ को गाँव के लोगों की जरूरतों का हिस्सा बना देंगे. फारेस्ट डिपार्टमेंट हमारे पत्र पर एस्टीमेट बनाने में लगा है लेकिन सरकारी गति से हम संतुस्थ नहीं हैं. गाँव की इतवारी देवी का मानना है इस पहाड़ पर हमारा सिंगबोंगा है और वह गाँव को हर आपद- बिपद से बचाता है. इतवारी देवी पहाड़ मेला कि तैयारी में जुटी है. मेले के लिए हर परिवार से १० रूपए और एक मुट्टी चावल लिए जा रहें है. मेले में वन संवाद की योजना है. देवेंदर ठाकुर कहते हैं, वन संवाद में लोगों की राय जानी जाएगी तथा राय के अनुसार गगारी पहाड़ को हरा- भरा बनाने की कोशिश की जाएगी. श्री ठाकुर का अनुमान है कि इस पहाड़ से १६- १७ गांवों के लिए तीन महीने का भोजन, ईंधन तथा मवेशियों के लिए बेहतर चारागाह के स्रोत उपलब्ध हो जायेंगे.