मनरेगा मजदूरों को धूप में छावं की तलाश

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तस्वीर द्वारा-

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लेखक-सुधीर पाल

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गढ़वा जिले के मेराल ब्लॉक के पोलोदोहा गाँव के मनरेगा मजदूर रामजी भुइयां को इस भीषण गर्मी में छावं और पीने के पानी की तलाश है. २००९ से मनरेगा में मजदूरी कर रहे रामजी को अब भी आस है कि मनरेगा कानून के इन प्रावधानों का अनुपालन होगा. झारखण्ड सहित ज्यादातर राज्यों में कार्यस्थल पर छायादार शेड, पेयजल, मेडिकल किट और बच्चों के लिए क्रेच की व्यवस्था नहीं हो पाई है. मनरेगा कानून के मुताबिक ०-६ वर्ष के हर पांच बच्चों की कार्यस्थल पर देखरेख के लिए एक महिला मजदूर रखने का प्रावधान है. विभाग का मानना है कि इतने बच्चे होते ही नहीं हैं कि क्रेच की व्यवस्था की जाए. रामजी भुइयां जैसे सैकड़ों मनरेगा मजदूरों को मलाल है कि २०१४ में किये गए काम का भुगतान आज तक नहीं हुआ है. मेराल के पिसर्बेतुका पंचायत के ४० लोग अब भी अपनी मजदूरी भुगतान के लिए संघर्षरत हैं. झारखण्ड मनरेगा वाच के संयोजक जेम्स हेरेंज़ कहते अभी मजदूरी भुगतान में ४५ दिनों से ज्यादा का समय लग रहा है. मजदूरों को दो-दो तीन –तीन बार पोस्ट ऑफिस जाना पड़ता है. सारे पोस्ट ऑफिस कंप्यूटराइज्ड नहीं हैं. वह बताते हैं एक तो मजदूरी कम है, उपर से भुगतान में विलम्ब हो रहा है और इससे मनरेगा के प्रति लोगों की रुझान कम हो रही है. मनरेगा मजदूर चंद्बसिया देवी कहती है, गर्मी और सूखे के बाद भी महिला मजदूरों को पुरुषों की तरह ही ७३ चौका मिटटी काटने पर एक दिन के मजदूरी भुगतान का प्रावधान है. इस गर्मी में महिला तो छोड़िये पुरुष भी इतनी मिटटी नहीं काट पाएंगे. प्रावधान होने के बाद भी महिलाओं को नर्सरी लगाने या पौधरोपण का काम नहीं दिया जाता है. गुमला के रायडीह, खूंटी के मुरहु, तोरपा आदि में महिलाओं को सॉफ्ट काम और नर्सरी के काम में लगाया गया और बेहतर परिणाम देखने को मिले. २०१३ से मनरेगा में काम कर रहे सुखदेव सिंह का कहना है अपने गाँव में काम नहीं दिया जट्टा है. गाँव से बाहर ५ किलोमीटर से ज्यादा दुरी पर काम देने पर मजदूरी का १० फीसदी यात्रा भत्ता देने की व्यवस्था है लेकिन ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि यह उन्हें नहीं मिल रहा है. लातेहार के मनिका में ३३३ लोगों ने ५ से २९ मार्च २०१६ के बीच काम माँगा था लेकिन उन्हें १५ दिनों के भीतर काम नहीं मिला. मनरेगा की उपलब्धि वर्ष २०१६-१७ – ५.८ क्रोड़े मानव दिवस सृजित महिलाओं की भागीदारी – ३३% एस टी लाभुक- ३९% एस सी लाभुक – १२% ५७८६ विकलांगो को काम मिला. १.७४ लाख परिवार को १०० दिन काम मिला. मजदूरों को औसत ५२ दिन काम मिला.